10 अगस्त 1942 को बलिया में स्कूल बंद रहे और छात्र सड़कों पर उतर आए. उमाशंकर सोनार और सूरज प्रसाद के नेतृत्व में जुलूस निकला, माल गोदाम पर विश्वनाथ प्रसाद मरदाना ने लोगों को संबोधित किया. छात्र आंदोलन ने आजादी की लड़ाई को नया विस्तार दिया और प्रशासन को चुनौती मिलने लगी.

