15 अगस्त 1942: जब बलिया में अंग्रेजी राज के बीच लहराया तिरंगा

15 अगस्त 1942 को बलिया में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन निर्णायक मोड़ पर था. बैरिया थाने पर तिरंगा फहराया गया, रेवती में पंचायती शासन कायम हुआ, जबकि शहर में डाकघर फूंका गया और माल गोदाम लूट लिया गया. कांग्रेस कार्यालय के कागजात भी सुरक्षित स्थान पर छिपाए गए.

Baghi Ballia 14 August

14 अगस्त 1942: जब बलिया की छात्राओं ने पुरुषों को चूड़ियां पहनने के लिए ललकारा, रेलवे स्टेशन और डाकघर फूंक दिए

14 अगस्त 1942 को बलिया की जनक्रांति ने उग्र रूप ले लिया. बिल्थरा रोड में छात्राओं ने पुरुषों को चूड़ियां पहनने की चुनौती दी, जिसके बाद जनता ने रेलवे स्टेशन और डाकघर फूंक दिए. इसी दिन बैरिया में क्रांतिकारियों ने थाना खाली करवाकर वहां तिरंगा फहरा दिया.

13 अगस्त 1942: जब बलिया की महिलाओं ने अंग्रेजी हुकूमत को दी खुली चुनौती

बलिया में आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा था. 10 और 11 अगस्त को छात्र और युवा क्रांतिकारी सक्रिय हुए. 12 अगस्त को छात्रों पर पुलिस कार्रवाई हुई और अगले दिन यानी 13 अगस्त को महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया.

Baghi Ballia 12 August 1942

12 अगस्त 1942: अदालतें बंद कराने निकले थे छात्र, बैरिया थाने पर कब्जे का हुआ था एलान

आजादी के आंदोलन में 12 अगस्त 1942 का दिन बलिया के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन छात्रों ने अदालतों का काम बंद कराने के लिए जुलूस निकाला. जवाब में पुलिस ने दमनकारी रवैया अपनाया, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां कीं, लेकिन आंदोलन नहीं रुका

august 11 ram anant pandey

11 अगस्त 1942: जब बलिया की क्रांति शहर से गांवों तक पहुंच गई

11 अगस्त 1942 को बलिया में करीब 20 हजार लोगों ने स्वतंत्रता जुलूस में हिस्सा लिया. रामअनंत पांडेय ने भारत छोड़ो आंदोलन के कार्यक्रम समझाए और अदालतों, बाजारों तथा दुकानों के बहिष्कार का आह्वान किया. उनकी गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन रानीगंज, बिल्थरारोड, खेजूरी समेत गांवों तक फैल गया.

10 august 1942 bagi ballia

10 अगस्त 1942: सड़कों पर उतरे छात्र, बलिया में आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

10 अगस्त 1942 को बलिया में स्कूल बंद रहे और छात्र सड़कों पर उतर आए. उमाशंकर सोनार और सूरज प्रसाद के नेतृत्व में जुलूस निकला, माल गोदाम पर विश्वनाथ प्रसाद मरदाना ने लोगों को संबोधित किया. छात्र आंदोलन ने आजादी की लड़ाई को नया विस्तार दिया और प्रशासन को चुनौती मिलने लगी.

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9 अगस्त 1942: जब बलिया ने अपनी लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया

9 अगस्त 1942 को कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी की खबर बलिया पहुंची तो आंदोलन तेज हो गया. पहले से तैयार राष्ट्रीय चेतना के बीच नेताओं और आम लोगों ने आंदोलन की कमान संभाली. गिरफ्तारियों के बावजूद बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया.

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बागी बलिया पखवाड़ा आज से, हर दिन सामने आएगी आजादी के संघर्ष की एक कहानी

बलिया LIVE पर आज से बागी बलिया पखवाड़ा शुरू हो रहा है. इसमें 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, बलिया की सरकार, चित्तू पांडे, मंगल पांडे और जगदीश्वर निगम से जुड़े प्रसंगों के जरिए संघर्ष, साहस और विद्रोह की कहानी सामने आएगी.

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प्रेमचंद विशेष: ‘मंत्र’ प्रतिशोध से ऊपर उठकर करुणा को चुनने की कहानी है

प्रेमचंद की ‘मंत्र’ सामाजिक अन्याय से आगे मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष की कहानी है. यह प्रतिशोध के सामने करुणा, क्रोध के सामने क्षमा और शक्ति के सामने मनुष्यता को रखती है. यही नैतिक दृष्टि प्रेमचंद को केवल यथार्थवादी कथाकार नहीं, बल्कि अपने समय से आगे का मानवीय कथाकार बनाती है.

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मुसाफिर कैफ़े: ऐसी लव स्टोरी, जो प्यार से ज़्यादा ज़िंदगी सिखाती है

Web Series Review: कुछ प्रेम कहानियाँ साथ नहीं, सोच बदलकर ख़त्म होती हैं. मुसाफिर कैफ़े एक ऐसी प्रेम कहानी है, जहाँ प्यार से ज़्यादा रिश्तों की परिपक्वता, सपनों का सम्मान और आगे बढ़ने का …

प्रेमचंद की कहानी

मुंशी प्रेमचंद ने क्यों कहा था, ‘मुझे जनता की रायसाहबी पसंद है, सरकार की नहीं’

ब्रिटिश सरकार द्वारा दिए जाने वाले ‘राय साहब’ के सम्मान को प्रेमचंद ने अस्वीकार कर दिया. शिवरानी देवी के साथ इस प्रसंग ने उनके नैतिक साहस, जनपक्षधरता और स्वतंत्र चेतना को और स्पष्ट किया. यह प्रसंग बताता है कि प्रेमचंद के लिए सत्ता का सम्मान नहीं, जनता का विश्वास और लेखक की आत्मा सबसे बड़ा मूल्य था.

mohd rafi anniversary

वह आवाज़ जिसे वक़्त भी ख़ामोश नहीं कर सका

मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि. यह लेख उनकी अद्वितीय गायकी, विनम्र व्यक्तित्व और सदाबहार गीतों को याद करता है. प्रेम, भक्ति, देशभक्ति और जीवन के हर भाव को स्वर देने वाले रफ़ी साहब की आवाज़ आज भी करोड़ों दिलों में गूंजती है और आने वाली पीढ़ियों तक गूंजती रहेगी.

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मुंशी प्रेमचंद जयंती विशेष: ‘फातिहा’ में प्रेम भी है, बदला भी और इंसानियत भी

मुंशी प्रेमचंद की कहानी “फ़ातिहा” केवल एक सैनिक की कथा नहीं, बल्कि प्रेम, ईर्ष्या, प्रतिशोध, करुणा, भ्रातृत्व और वात्सल्य जैसे मानवीय भावों का गहरा दस्तावेज़ है. नाज़िर, तूरया और मेजर हिम्मत सिंह के जीवन के माध्यम से कहानी इंसानी रिश्तों की जटिलता, त्याग और क्षमा के दुर्लभ पक्षों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है.

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बलिया के सुरहा ताल को 100वें रामसर साइट का दर्जा, पीएम मोदी, सीएम योगी ने जताई खुशी

सुरहा ताल रामसर साइट-बलिया के जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को देश का 100वां रामसर साइट घोषित किया गया है।

बलिया से हूं, हाईस्कूल, इंटर थर्ड डिविजन पास, क्या कंपनी में हेड बनाएंगे! जानिए ZOHO को-फाउंडर का जवाब

Please LIKE and FOLLOW बलिया LIVE on FACEBOOK page https://www.facebook.com/BalliaLIVE बलिया. सोशल मीडिया पर खुद को बलिया का बताने वाले एक यूजर ने एक मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी ZOHO के को-फाउंडर, पूर्व सीईओ और चीफ …

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नए साल में बलिया को मिलेगा सुपर स्पेशलिटी इलाज, जिला अस्पताल में चल रही बड़ी तैयारी

जिला अस्पताल में इलाज की सुविधाओं को लेकर आने वाला साल बेहद अहम होने जा रहा है। सीएमओ डॉ. संजीव वर्मन ने बताया

माघ मेला 2026: बलिया के यात्रियों को बड़ी राहत, 1 जनवरी से चलेंगी दो अनारक्षित रिंग रेल

माघ मेला 2026 के दौरान रेलवे ने 1 जनवरी से 17 फरवरी तक दो अनारक्षित रिंग रेल चलाने का फैसला किया, बलिया के यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत।

युवाओं में राष्ट्रभक्ति जगाने को ‘विकसित भारत पदयात्रा’ — परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में ‘विकसित भारत पदयात्रा’ आयोजित की जा रही है

Membership of computer education was given to all the students.

नवचयनित मुख्य सेविकाओं के लिए जनपद वरीयता भरने का पोर्टल सक्रिय

जनपद के अंतर्गत नवचयनित मुख्य सेविकाओं की तैनाती के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://icdspreference.upsdc.gov.in

Ballia- गेंदे की खेती बन रही किसानों की पहली पसंद, लागत कम और मुनाफा लाखों का

परंपरागत खेती से हटकर बांसडीह क्षेत्र के किसानों को ऐसी फसलों की खेती पसंद आ रही है जिनसे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सके।