बलिया जनपद में धान क्रय अवधि 01 नवम्बर 2024 से 28 फरवरी 2025 निर्धारित है
बलिया जनपद में धान क्रय अवधि 01 नवम्बर 2024 से 28 फरवरी 2025 निर्धारित है
नीय तहसील परिसर में शुक्रवार को धान की बिक्री के लिये खतौनी सत्यापन के लिये पंहुचे किसान युवक की सत्यापन को लेकर तकनीकी समस्याओं को लेकर बहस हो गयी जिसके बाद आक्रोशित युवक ने लेखपाल से हाथापाई कर उनके चेहरे पर घूंसा मार दिया.
जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि आधे घंटे से एंबुलेंस के लिए फोन लगाया जा रहा है.
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील किया कि वह शासन स्तर से जनपद में खोले गए धान क्रय केंद्रों पर ही अपनी उपज बेचें. उन्होंने डिप्टी आरएमओ को निर्देश दिया कि धान खरीद में कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए.
इस अवसर पर डीडीओ राजित राम मिश्र, जिला कृषि अधिकारी पवन कुमार प्रजापति, डीएसओ रामजतन यादव, भूमि संरक्षण अधिकारी संतोष यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी व जनपद के किसान भाई मौजूद थे.
बसंतपुर में कालानमक किरण की 42 एकड़ में हो रही खेती. बलिया जिले के सुल्तानपुर निवासी आनंद सिंह के अथक परिश्रम और प्रगतिशीलता सोच के बदौलत बसंतपुर में 42 एकड़ में धान की खास प्रजाति ‘कालानमक किरण’ की फसल औसत से कम बरसात के बाद भी लहलहाती दिख रही है.
राइस मिल मालिक पूर्व में डिफाल्टर घोषित हो चुके है उन्हें धान न दिया जाए क्योंकि इनकी वजह से सरकार का नुकसान तो होता ही है साथ ही किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सीएमआर समय से उपलब्ध न होने से किसानों से धान क्रय करने में देरी हो जाती है जिससे उनका भारी नुकसान होता है.उन्होंने डिप्टी आरएमओ को निर्देश दिया कि जिन मिलो को धन नहीं मिल पा रहा है उन्हें समय से धान उपलब्ध कराया जाए. जिलाधिकारी ने कहा कि गलती की कोई माफी नहीं है. उ
नहरों में नहीं आया पानी, किसान परेशान
क्षेत्रीय जन संपर्क एवं भ्रमण कार्यक्रम के बाद पूर्व मंत्री राजधारी सिंह ने बताया कि समय से सरकारी धान क्रय केंद्रों के संचालन ना होने से किसान मजबूरन अपना धान ओने पौने दाम पर व्यापारियों को बेच रहे हैं
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत धान, मक्का एवं अरहर की फसल अधिसूचित
हम अपने गांव आए हैं. धान की खेती के लिए खेत पहले से ही जोतकर तैयार कर लिए गए हैं. धान की रोपाई के लिए बीज यानी बेहन डाली जा चुकी है, जो तैयार है. लेकिन अभी तक जोरदार बारिश नहीं हुई है. छीटपुट बारिश या झींसी पड़ने से भला धान की रोपाई होती है !! मानसून आ गया है.
मौसम की अनिश्चितता इलाकाई किसानों पर भारी पड़ने लगा है. इसी के साथ सिंचाई के सरकारी संसाधनों की दगा ने उनकी सांसे फुला कर रख दिया है.
मौसम की बेरुखी से किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खिंच दी है. विगत कई वर्षों से सूखा की मार झेल रहे इस वर्ष भी बरसात न होने से किसानों प्रकृति की दोहरी मार झेलने पर विवश हैं. रसड़ा क्षेत्र स्थित नहरों में भी पानी नदारद है.
रविवार के अपराह्न बाद झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. धान की बेहन डालकर महंगे दामों पर डीजल खरीदकर ट्यूबवेल द्वारा पानी चलाकर अपनी खेती को किसी तरह जिला रहे किसानों के चेहरे रविवार को इंद्रदेव की कृपा होते ही खिल उठे.
सुल्तानपुर गांव मे स्थापित नलकुप 27 बीडीजी का ट्रांसफॉर्मर करीब एक माह से जला पड़ा है. कई बार शिकायत के बाद भी विद्युत कर्मचारी ट्रांसफॉर्मर बदलवाने मे रुचि नहीं दिखा रहे हैं.
तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थापित क्रय केंद्रों पर धान की सरकारी खरीदारी की धीमी गति किसानों पर भारी पड़ने लगा है.
मंगलवार को किसानों का आक्रोश उस समय धान क्रय केन्द्र पर फूट पड़ा, जब लगातार एक सप्ताह बाद भी केन्द्र पर विपणन निरीक्षक (क्रय) नदारद मिले. किसानों ने गोदाम पर धान क्रय केंद्र अधिकारी पुनेन्दु प्रवीण का पुतला दहन करने के साथ ही घेराव कर दिया.
धान खरीद की प्रगति काफी कम होने पर जिलाधिकारी गोविंद राजू एनएस ने गहरी नाराजगी जताई है. रविवार की देर रात तक विपणन अधिकारियों संग बैठक कर कड़े निर्देश दिये. सचेत किया कि समय रहते खरीद में तेजी नही आई और किसानों को दिक्कत हुई तो जिम्मेदार बख्शे नहीं जाएंगे.
पूर्व मंत्री राजधारी ने क्षेत्रीय जन सम्पर्क के बाद बताया कि सरकारी धान की खरीदारी अभी तक प्रारम्भ न होने से किसान अपना धान औने-पौने कीमत पर व्यापारी को बचेने पर मजबूर है. गांवों में व्यापारी किसान का धान उधार तथा कीमत में प्रति क्विंटल 300 रुपये से 400 रुपये तक की कमी करके खरीद रहे है. जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
नवानगर व पंदह ब्लॉक के कतिपय क्रय केंद्रों पर अब तक सरकारी धान की खरीदारी शुरू नहीं किए जाने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है.