मंगल पांडे के पैतृक आवास पर जाकर मंगल पांडे विचार सेवा समिति ने उनके परिजन को किया सम्मानित
स्मारक सोसाइटी के सचिव ओमप्रकाश तिवारी ने जरूरतमंदों में बांटा कंबल
मंगल पांडे के पैतृक आवास पर जाकर मंगल पांडे विचार सेवा समिति ने उनके परिजन को किया सम्मानित
स्मारक सोसाइटी के सचिव ओमप्रकाश तिवारी ने जरूरतमंदों में बांटा कंबल
शहीद मंगल पांडेय स्मारक समिति के सचिव ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि स्मारक के सुंदरीकरण के अंतर्गत स्मारक परिसर में मंच का नया निर्माण किया गया है.
अगस्त क्रांति दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडे के गांव में अंधेरा, 8 दिन बाद भी नहीं बहाल हुई बिजली
दुबहर, बलिया. क्षेत्र के नगवा गांव पश्चिम टोला में शनिचरा बाबा मंदिर के पास लगा 100 केवीए का ट्रांसफार्मर पिछले 8 दिनों से जल जाने के कारण गांव में अंधेरा व्याप्त है.
मेहनत के बल पर दिनेश ने अपना मुकाम हासिल किया चहुंओर खुशी खुशी [Read Full Post]
बाइक रोककर मनबढ़े युवकों ने चालक को चाकू से किया घायल प्राथमिकी दर्ज [Read Full Post]
तहसील दिवस पर आ धमके डीएम और एसपी
स्वतंत्रता संग्राम के नायक वीरवर बाबू कुंवर सिंह को याद करते हुए इस जगह पर स्थित 12 कट्ठा भूमि पर उक्त स्थल की मिट्टी को लेकर जुटे लोगों ने संकल्प लिया कि यहां कुंवर बाबू की स्मृति में एक आकर्षक स्मारक निर्मित कराया जाएगा.
केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों को गिनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में मोदी और योगी की डबल इंजन की सरकार है. प्रधानमंत्री द्वारा यूपी और योगी को मिलाकर उपयोगी की संज्ञा दिए जाने को विस्तार देते हुए श्री चौहान ने कहा कि मोदी प्लस योगी मतलब 86 लाख किसानों का कर्ज माफ. मोदी प्लस योगी का मतलब गन्ना किसानों का एक लाख 44 हजार करोड़ का भुगतान. पीएम फसल बीमा योजना के 26 सौ करोड़ का भुगतान.
बांसडीह डाक बंगला पर स्थित शहीद पंडित रामदहीन ओझा की प्रतिमा पर माल्यापर्ण
18 अगस्त 1942 को ही हो गया था आजाद, द्वाबावासियों के लिए गौरव का दिन
23 अगस्त को सुखपुरा कस्बा स्थित शहीद स्मारक पर झण्डातोलन कर पुष्पाजंलि अर्पित की गई. स्मारक समीति के अध्यक्ष महाबीर प्रसाद ने झण्डा फहराया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शहीदों का सपना देश को गुलामी से मुक्त कर स्वर्णिम भारत का निर्माण करना हैं.
अगस्त क्रांति 1942 मे बलिया के लोग आजादी पाने के लिए अग्रेजी हूकुमत से लड़ रहे थे. सुखपुरा मे भी क्रांतिकारियों की फौज खड़ी थी. बलिया के तरफ जा रहे पांच सिपाहियों का बंदूक 18 अगस्त को सुखपुरा में क्रांतिकारियों ने छीन लिया.
बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला एथलेटिक एसोसिएशन बलिया एवं कम्युनिस्ट अवेयरनेस रिसर्च एण्ड एजुकेशन सोसाइटी के तत्तावधान में एक सद्भावना दौड़ का आयोजन छाता क्रासिंग के दवनी फील्ड तक सम्पन्न हुआ.
बैरिया मैं तिरंगा फहराने तथा पुलिस फायरिंग में भारी संख्या में लोगों के शहीद होने के बाद जहां ब्रिटिश हुकूमत घबरा गई थी, वहीं पर बलिया के बच्चे, बूढ़े, जवान सभी में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ बगावत कूट-कूट कर भर गया था.
गुरुवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन की अध्यक्षा राधिका मिश्रा के नेतृत्व में शहीद श्रद्धांजलि यात्रा को हरी झंडी दिखाकर अपर जिलाधिकारी मनोज सिंघल ने बैरिया के लिए रवाना किया.
19 अगस्त 1942 को ही स्वतंत्र होने का बलिया को गौरव प्राप्त है. 3 दिन आजाद रहने तथा चित्तू पांडेय की समानांतर सरकार चलने के बाद अंग्रेजों ने पुनः बलिया पर कब्ज़ा कर लिया था.
जंगे आजादी में युवाओं के योगदान, छात्र शक्ति राष्ट्र शक्ति की बानगी है बलिया का महावीरी झंडा जुलूस. ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर पांडुलिपि संरक्षण मिशन के जिला समन्वयक शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि ब्रितानी गुलामी के अमंगल को मिटाने के लिए प्रथम बलिदानी मंगल पांडेय की धरती पर उनकी बगावत के 52 साल बाद जॉर्ज पंचम की ताजपोशी के विरोध में महावीरी झंडा जुलूस की शुरुआत हुई थी.
बैरिया थाने पर कब्जा करने की नीयत से बलिया के कोने-कोने से हजारों लोगों का हुजूम इकट्ठा हुआ. सबसे पहले बैरिया थाने पर लोग टूट पड़े और घुड़साल को लोगों ने जमींदोज कर दिया. इस घटना से भड़की ब्रिटिश पुलिस ने भीड़ पर गोलियों की बौछार कर दी. नारायणगढ़ निवासी युवा कौशल किशोर सिंह बैरिया थाने पर तिरंगा फहराते हुए पुलिस की गोली से शहीद हो गए.
1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 16 अगस्त 1942 को बलिया में महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया था. बलिया शहर में धारा 144 को तोड़ने के लिए महिलाओं ने भारी तादाद में इकट्ठी हो जुलूस निकाला.
अन्याय, अत्याचार, जुल्म के खिलाफ संघर्ष के लिए जाना जाता रहा है बलिया. ब्रिटिश हुकूमत की शक्तियों की बिना परवाह किए 15 अगस्त 1942 को ही यहां जगह जगह तिरंगा फहरा दिया गया था. 15 अगस्त 1942 को ही ब्रिटिश हुकूमत के यूनियन जैक में आग लगाकर जगह जगह तिरगा लहराया गया था.
जब ब्रिटिश हुकूमत ने बलिया में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ रहे लोगों पर कहर ढाना शुरू किया तो 13 अगस्त 1942 को महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. महिलाएं बलिया चौक में एकत्रित हुईं और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
1942 का आंदोलन बलिया में उग्र होता जा रहा था. अंग्रेजों का जुल्म भी बढ़ता जा रहा था. आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने जिला अधिकारी एवं पुलिस कप्तान को व्यापक अधिकार दे रखे थे.