इस सेवा शिविर के माध्यम से कार्तिक पूर्णिमा स्नान करने आए श्रद्धालुओं की असुविधा न हो व उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई.
इस सेवा शिविर के माध्यम से कार्तिक पूर्णिमा स्नान करने आए श्रद्धालुओं की असुविधा न हो व उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई.
एसपी एस आनंद ने बताया कि बैरिया की तरफ से आने वाले भारी मालवाहक व व्यावसायिक वाहनों को थाना दुबहड़ के पास मंगलवार की दोपहर तीन बजे से स्नान पर्व समाप्ति तक रोका जाएगा.
बाहर से आने वाले स्नानार्थियों को जानकारी देने के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं जगह-जगह अपना शिविर स्थापित कर दी हैं.
सुनिधि के गीत और सपना के ठुमके से रंगीन होगी ददरी मेले की शाम – लखनऊ महोत्सव की तर्ज पर लगेगा ददरी मेला
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उन्होंने गंगा तट पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने और जागरूकता के लिए फ्लैक्स व बोर्ड लगाने के निर्देश दिए. साथ ही तट पर गोताखोर और जल पुलिस की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए.
जनपद में ददरी मेला 27 नवंबर से प्रारंभ होकर 18 दिसंबर तक आयोजित होना प्रस्तावित है. इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु जनपद स्तर पर विभिन्न विभागों के नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है.
मेले में महिलाएं अपनी जरूरत की वस्तुओं को खरीदारी की तो वहीं बच्चों ने चाट ,जिलेबी के साथ चरखी, झूले का आनंद लिया. मेले में थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अजय कुमार यादव अपनी पुलिस टीम के साथ पूरे दिन मुस्तैद रहे.
सिकन्दरपुर, बलिया. मौनी अमावस्या के मौके पर सरयू के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. खरीद घाट पर हजारों श्रद्धालु सुबह-सुबह आस्था की डुबकी लगाते नजर आए. कुतुबगंज के घाट …
पूर्णिमा स्नान के लिए भोर से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे घाट पर
कार्तिक पूर्णिमा स्नान की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक चहलकदमी भी तेज हो गई है
इलाहाबाद में मौनी अमावस्या पर शुक्रवार ( 27 जनवरी ) को देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने गंगा, यमुना और संगम में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया.
27 जनवरी को मौनी अमावस्या है. प्रशासन का अनुमान है कि शुक्रवार को देश के कोने-कोने से आए 1.5 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे.
आज का कार्तिक पूर्णिमा का सृष्टि के आरंभ से ही इस तिथि का खास महत्व रहा है. सिर्फ वैष्णवों और शैवों के लिए ही नहीं, वरन सिखों और जैनियों के लिए भी. अभी आपने देवोत्थानी एकादशी मनाई थी. उस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागे थे. कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन उन्होंने पालनकर्ता के रूप में अपनी पूरी जिम्मेदारी उठा ली थी.