Ballia-चरौंवां बलिदान दिवस पर अमर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि, मेले में उमड़ी भीड़

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उमेश गुप्ता, बेल्थरारोड,बलिया

बेल्थरारोड,बलिया. सीयर ब्लॉक के चरौंवां गांव में हर साल की भांति इस साल भी चरौवां बलिदान दिवस के मौके पर मंगलवार को अमर शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम एवं मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, ग्रामीणों और पत्रकारों ने पहुंचकर देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रत्येक वर्ष इस शहीद स्थल के आस पास मेला लगता है, जहां मिष्ठान, बच्चों के खेल खिलौने, सौन्दर्य प्रशाधन, फल-फूल आदि की दुकाने लगती हैं। जिसका आनन्द वर्ष में एक बार शहीदी मेला के रुप में देखने को मिलता है। शहीद स्तंभ के पास परम्परा के अनुसार तहसीलदार अजीत कुमार सिंह, क्रांतिकारी स्मारक समिति चरौवा के अध्यक्ष मारकण्डे सिंह एवं ग्राम प्रधान देवेन्द्र यादव ने संयुक्त रुप से ध्वजारोण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया.

चरौंवां के अमर शहीदों के बलिदान को याद करते हुए लोगों ने कहा कि देश की आजादी का इतिहास वीर सपूतों के त्याग और संघर्ष से लिखा गया है। चरौंवां के शहीदों ने अंग्रेजी हुकूमत के दमन के सामने जिस साहस का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

क्रांतिकारी स्मारक समिति चरौवां के अध्यक्ष मारकण्डे सिंह ने कहा कि अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए सन् 1942 के भारत स्वाधीनता संग्राम के दौरान बलिया के क्रान्तिकारी वीरो में देश के प्रति तरुणाई जाग उठी। इस जंग में सीयर ब्लाक के चरौंवां गॉव के अमर शहीदों एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो ने 25 अगस्त को अपने प्राणो की आहूति देकर बलिया का नाम स्वर्णिम अक्षरों मे अंकित कर दिया।

बलियावासियों के उग्र तेवर को देख अंग्रेज हुकमरान दंग रह गये। और उनकी शूर-वीरता व अदम्य साहस से ब्रिटिश खेमे में खलबली मच गयी थी। इसके कारण अंग्रेज हुक्मरानो ने विशेषाधिकार युक्त सर्वोच्च प्रशासक नेदरसोल व मार्क स्मिथ के नेतृत्व मे जल मार्ग से अंग्रेजी फौज की टुकड़ी बलिया भेजी थी।

इस फौज का एक दास्ता कैप्टन मूर की देखरेख में ग्राम चरौंवां पहुंचा। अंग्रेजों कों खुफिया रिर्पोट से पता चला कि चरौंवा गॉव क्रान्तिकारियो की गुप्त गतिविधियो का केन्द्र है। अंग्रेजो ने 25 अगस्त सन् 1942 को पूरे गॉव को घेर लिया और गॉव के मुखिया रामलखन सिंह के यहां चैकीदार भेजकर संदेश दिया कि पूरे गॉव को तबाही से बचाना चाहते हो तो क्रान्तिकारियो को हमें सौंप दो। चौकीदार की बात सुनते ही मुखिया रामलखन सिह आग बबूला हो गये और चौकीदार के कान पर ऐसा थप्पड़ मारा की कान से खून टपक पड़ा। इसके बाद अंग्रेजो ने दमन चक्र के तहत चरौंवां गॉव मे गोलिया बरसानी शुरू कर दी।

तब क्रान्तिकारियो ने ग्रामीणो को ललकारा कि अंग्रेजों के हाथ मे बन्दूके हैं तो हमारे हाथ मे लाठी। जोश से भरे ग्रामीण लाठी लेकर अंग्रजो पर टूट पड़े जिससे अंग्रेजो मे भगदड़ मच गयी। अंग्रेजो की गोली से खर-बियार शहीद हो गया। यह देख मकतुलिया मालिन ने कैप्टन मूर के सिर पर मिट्टी की हाड़ी चलाकर मार दी जिससे कैप्टन मूर का सिर फूट गया और वह तमतमा उठा और वह गुस्से में आकर मकतुलिया मालिन को गोली मार दी।

यही नहीं अंग्रेजो ने मृत मकतुलिया मालिन के शव को ले जाकर घाघरा नदी मे फेकवा दिया। अंग्रेजो के द्वारा की गयी गोलाबारी मे मंगला सिंह, शिवशंकर सिंह, अंग्रेजो से लड़ते हुए शहीद हो गये। इस तरह चरौंवा के चार शुरवीर सपूतो ने देश के लिए शहादत दी।

इस दौरान बृजबिहारी सिंह, राधाकृष्ण सिंह, कन्हैया सिंह, कपिलदेव सिंह, श्रीराम तिवारी, दशरथ सिंह , हरिप्रसाद स्वर्णकार, आदि ने अंग्रजो के दॉत खट्टे कर दिये। अंग्रेजों के इस ताण्डव की प्रतिक्रिया पूरे दश मे हुई। इसे गम्भीरता से लेते हुए कांग्रेस कमेटी ने फिरोज गॉधी को वस्तुतः स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा। इस हृदय विदारक सहादत को देख फिरोज गॉधी भी फफक का रो पड़े।

इन शहीदों-क्रांतिकारियों की याद में चरौंवां में शहीद स्तंभ का निर्माण कराया गया है। आज भी 25 अगस्त को शहीद स्थल पर मेला लगता है। जहॉ विभिन्न दलो के प्रतिनिधि व संगठन के लोग कार्यक्रम मे भाग लेते है। वक्ताओं ने कहा कि चरौंवां की वीरगाथा केवल गांव की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश के लिए गौरव का विषय है। शहीदों के बलिदान को याद रखना और नई पीढ़ी तक उनकी गाथा पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।

 

इस अवसर पर अरशद हिंदुस्तानी, प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह, प्रधानाध्यापक राधेमोहन सिंह तथा पूर्व विधायक धनंजय कनौजिया ने कार्यक्रम में आए अतिथियों एवं पत्रकारों को माला पहनाने के बाद अंगवस्त्र (गमछा) देकर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान लोगों ने शहीदों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में माली विकास कल्याण समिति के सदस्यों की भी सक्रिय सहभागिता रही। समिति के सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया और अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान साहब लाल यादव, रामकृपाल यादव, रामजीत यादव, देवेन्द्र यादव लोक गीत गायक ने शहीदी गीतों से सभी के अन्दर देश भक्ति का जज्बा पैदा कर दिया, वही अरशद हिन्दुस्तानी, नन्द जी नन्दा, जितेन्द्र त्यागी ने अपनी कविताओं से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।

इस मौके पर खण्ड विकास अधिकारी सूर्यप्रकाश, सचिव विजयेन्द्र कुमार, सपा के प्रदेश सचिव आद्याशंकर यादव एडवोकेट, सपा के राजेश पासवान, राजन कन्नौजिया, माली कल्याण समिति बलिया के जिलाध्यक्ष बीरेन्द्र सैनी, संरक्षक कन्हैया माली, तहसील अधिवक्ता एसोसियेशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह, महामंत्री दिलरोज अहमद, ग्राम प्रधान देवेन्द्र यादव, परवेज कमाल पाशा, राशिद कमाल पाशा, सविता सिंह पटेल एडवोकेट, अखिलेश पाण्डेय, सुरेश चन्द्र त्रिपाठी, कामेश्वर पाण्डेय, द्विजेन्द्र मिश्र, पारसनाथ वर्मा, गंगा सागर सिंह आदि मौजूद रहे।  कार्यक्रम की अध्यक्षता जयप्रकाश नारायण सिंह एवं संचालन श्याम नारायण सिंह ने किया।

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