प्रेमचंद की ‘मंत्र’ सामाजिक अन्याय से आगे मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष की कहानी है. यह प्रतिशोध के सामने करुणा, क्रोध के सामने क्षमा और शक्ति के सामने मनुष्यता को रखती है. यही नैतिक दृष्टि प्रेमचंद को केवल यथार्थवादी कथाकार नहीं, बल्कि अपने समय से आगे का मानवीय कथाकार बनाती है.

