बलिया में याद किए गए मध्यकालीन संत साहित्य के विद्वान आचार्य परशुराम चतुर्वेदी

आचार्य चतुर्वेदी मध्यकालीन संत साहित्य के विद्वान के रूप में सम्मानित हैं. श्रीमती सूरजा देवी एवं राम छबीला चतुर्वेदी के पुत्र के रूप में आचार्य परशुराम चतुर्वेदी का जन्म बलिया जनपद के जवही ग्राम में आज ही के दिन हुआ था. पेशे से वकील होने के बावजूद आपका मन साहित्य साधना में रमा और आपने विद्वता का शिखर छूआ.

कुलपति की पुस्तक ‘गर्भ संस्कार: एक उत्कृष्ट परंपरा’ का राज्यपाल ने किया विमोचन

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक संस्कार गर्भ संस्कार भी है. इस संस्कार को आत्मसात करके हम शिशु के अंदर अच्छे संस्कार प्रदान कर सकते हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. अधिकतर महिलाएं जागरूकता के अभाव में इस पर ध्यान नहीं देती हैं. उनका मानना है कि भ्रूण से शिशु के साथ उसके संस्कार का भी जन्म होता है.