ऐतिहासिक ददरी मेला के दूसरे रविवार को मेलार्थियों से खचाखच भरा रहा. सुबह से लेकर देर रात तक मेला में चहल-पहल रही. जहां विभिन्न व्यंजनों की दुकानों पर मेलार्थी जायका लेते रहे, वही झूला, चर्खी, सर्कस, मौत का कुंआ जैसे मनोरंजन के संसाधनों पर बच्चों ने खूब इंज्वाय किया.

