15 अगस्त 1942: जब बलिया में अंग्रेजी राज के बीच लहराया तिरंगा

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आज 15 अगस्त है. पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. तिरंगा देशभर में शान से लहरा रहा है लेकिन बलिया के लिए 15 अगस्त की कहानी कुछ अलग है. बलिया के लोगों ने आजादी का यह एहसास देश की आजादी से पांच साल पहले ही महसूस कर लिया था.

 

वह साल था 1942. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिया में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन तेज हो चुका था. 15 अगस्त तक जिले के कई हिस्सों में क्रांतिकारियों और जनता ने अंग्रेजी प्रशासन को चुनौती दे दी थी.

 

बैरिया में 15 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता सेनानियों ने थाना परिसर पर नियंत्रण हासिल कर लिया और वहां तिरंगा फहराया. जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास में यह घटना 15 अगस्त की दर्ज है. बाद में थाने के अधिकारी ने तिरंगा उतार दिया. यही घटना आगे चलकर बड़े टकराव की वजह बनी.

 

स्थानीय विवरणों में बैरिया में तिरंगा फहराने की शुरुआत 14 अगस्त से भी जोड़ी जाती है. हालांकि आधिकारिक जिला इतिहास 15 अगस्त की तारीख दर्ज करता है. इसलिए इस सीरीज में 15 अगस्त को मुख्य तिथि माना जा रहा है.

 

बैरिया थाने पर फहराया गया तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं था. यह इस बात का दावा था कि जिस जमीन पर अंग्रेजी सरकार शासन कर रही है, वहां भारतीय जनता अपना अधिकार स्थापित कर सकती है.

 

उधर रेवती का पूरा क्षेत्र अंग्रेजी प्रशासन से अलग होकर आजादी का आनंद लेने लगा था. वहां तुरंत पंचायती शासन की व्यवस्था कर दी गई, जो करीब दस दिनों तक चली. बलिया शहर भी इस आंदोलन से अछूता नहीं था. 15 अगस्त को शहर का डाकघर फूंक दिया गया. इसके बाद माल गोदाम को लूट लिया गया.

 

इसके बाद क्रांतिकारियों ने पुलिस के कब्जे से कांग्रेस कार्यालय को छुड़ा लिया. वहां रखे कागजात को सुरक्षित रखने के लिए गंगाराम तेली के गोदाम में छिपाकर रख दिया गया.

 

इस तरह 15 अगस्त 1942 को बलिया में आंदोलन सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं था. कई जगहों पर जनता अंग्रेजी शासन को चुनौती दे रही थी. कहीं तिरंगा फहराया जा रहा था, कहीं पंचायती शासन चल रहा था और कहीं सरकारी प्रतिष्ठानों पर क्रांतिकारियों का कब्जा हो रहा था.

 

देश को 1947 में आजादी मिली. लेकिन बलिया के लोगों ने 1942 में ही आजादी की उस भावना को महसूस कर लिया था.

 

‘बागी बलिया पखवाड़ा’ के तहत आज की कहानी उसी 15 अगस्त 1942 की है, जब बलिया में आजादी का सपना सिर्फ सपना नहीं रहा था, बल्कि कई जगहों पर वह हकीकत की तरह दिखाई देने लगा था.

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