सांसद भरत सिंह ने बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेला को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए भारत सरकार के पर्यटन राज्य मंत्री केजे अल्फोंस से नई दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की.
सांसद भरत सिंह ने बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेला को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए भारत सरकार के पर्यटन राज्य मंत्री केजे अल्फोंस से नई दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की.
ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व का प्रसिद्ध ददरी मेला शुरू
सभी 16 मजिस्ट्रेट व पुलिस के अधिकारियों की ब्रीफिंग पुलिस लाइन के आरडी त्रिपाठी हाल में
कार्तिक पूर्णिमा मुख्य स्नान 3/4 नवम्बर को है.
ददरी मेले की तैयारी के सम्बंध में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक हुई.
ऐतिहासिक ददरी मेला के भारतेंदु कला मंच पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश विदेश में ख्यातिलब्ध कवियों का काव्य पाठ होने जा रहा है. आगामी 30 नवम्बर दिन बुधवार को रात्रि 8 बजे से भारतेंदु कला मंच एक बार फिर गंगा जमुनी तहजीब की काव्य सुरसरि का साक्षी बनेगा, जिसमे देश के दर्जन भर से अधिक मशहूर कवि अपने काव्यपाठ से उपस्थित श्रोताओं को आनंदित करने का काम करेंगे.
ऐतिहासिक ददरी मेला के दूसरे रविवार को मेलार्थियों से खचाखच भरा रहा. सुबह से लेकर देर रात तक मेला में चहल-पहल रही. जहां विभिन्न व्यंजनों की दुकानों पर मेलार्थी जायका लेते रहे, वही झूला, चर्खी, सर्कस, मौत का कुंआ जैसे मनोरंजन के संसाधनों पर बच्चों ने खूब इंज्वाय किया.
सोमवार 28 नवम्बर को रात 8 बजे से अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन ददरी मेला के भारतेंदु कला मंच पर किया गया है. नगर पालिका परिषद बलिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मु. असलम (जिला जज, बलिया) और विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण होंगे.
रेलवे प्रशासन द्वारा कार्तिक पूर्णिमा मेला (ददरी मेला) 2016 के अवसर पर होने वाली यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की है. 14 नवम्बर, 2016 को गाड़ियों का अतिरिक्त ठहाराव, अस्थाई ठहराव दिया जाएगा तथा विषेष गाड़ियां चलायी जायेंगी.
देश का मशहूर ददरी मेला दीपावली से सजने लगा है. धीरे-धीरे मेला में पशुओं को पशुओं के आने का क्रम शुरू हो गया है. अन्य जनपदों से भी पशु व्यापारी आने लगे हैं. पशु मेला की सुरक्षा की व्यवस्था के लिए अलग से थाना स्थापित किया गया है. पुलिस उप निरीक्षक विवेक पांडेय को इसका प्रभारी बनाया गया है.
मनुष्य एक विचारवान प्राणी है. यह एक ओर जहां अपनी सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सचेष्ट और प्रयत्न शील रहता है, वहीं दूसरी ओर अपनी मुक्ति के लिए भी आतुर और चिंतित रहता है. ऋषि-महर्षियों चिंतकों मनीषियों और धर्म धुरंधरों ने मानव की इसी चित्त-वृत्ति को देखते हुए लोकमंगल की भावना से समय समय और स्थान स्थान पर मुक्ति के साधन और स्थल को भी रेखांकित किया है.