कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कृति ” गोदान ” का सजीव मंचन
– बाहर बरसते रहे बादल अंदर बजती रही तालियां
– कल यही कलाकार फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्री बनेंगे कौशिकेय
कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कृति ” गोदान ” का सजीव मंचन
– बाहर बरसते रहे बादल अंदर बजती रही तालियां
– कल यही कलाकार फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्री बनेंगे कौशिकेय
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