22-23 अगस्त 1942 की रात: जब बलिया की पांच दिन की आजादी पर अंग्रेजी फौज ने फिर कब्जा किया

22-23 अगस्त 1942 की रात ब्रिटिश सेना ने बलिया पर फिर कब्जा कर लिया. इससे पहले बलिया पांच दिन तक आजाद रहा था. इसके बाद शहर और गांवों में गोलीबारी, लूट, आगजनी और क्रांतिकारियों पर अमानवीय अत्याचार का दौर चला, लेकिन बलियावासियों ने अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके.

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21 अगस्त 1942: बलिया में चौकीदार से कलेक्टर तक सबने हथियार डाल दिए

21 अगस्त 1942 को बलिया में जनक्रांति निर्णायक दौर में पहुंची. हजारों क्रांतिकारियों ने सिकंदरपुर समेत कई स्थानों पर अंग्रेजी प्रशासन को चुनौती दी. थानों पर तिरंगा फहराया गया, सरकारी कागजात जलाए गए और स्वराज सरकार का संचालन शुरू हुआ. अंग्रेज नौकरशाही को अंततः आत्मसमर्पण करना पड़ा.