खेत में निराई गुड़ाई करते वक्त करेंट की चपेट में आकर बृहस्पतिवार को दंपति गंभीर रूप से झुलस गए. जिला अस्पताल में उपचार के दौरान पति ने दम तोड़ दिया. पत्नी की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है.
खेत में निराई गुड़ाई करते वक्त करेंट की चपेट में आकर बृहस्पतिवार को दंपति गंभीर रूप से झुलस गए. जिला अस्पताल में उपचार के दौरान पति ने दम तोड़ दिया. पत्नी की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है.
राहत के लिए 62 बाढ़ चौकियां, 62 राहत शिविर, 45 राहत वितरण केंद्र संचालित है. राहत शिविर में 26,600 लोगों ने शरण लिया है. बुधवार तक 41,535 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. 41 मेडिकल टीमें लगी है और 37,126 लोगों का उपचार किया जा चुका है.
सपा के जिला महासचिव मनोज सिह ने बुधवार को गंगा के बाढ व कटान से पीडित शिवपुर कपूर दियर, हृदयपुर व बहुआरा के पीड़ितों में तिरपाल व गुड़ लाई चूड़ा आदि टिकाऊ खाद्यपदार्थो का वितरण किया.
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बलिया में गंगा, घाघरा, तमसा के तेवर में नरमी आई है, हालांकि गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. वाराणसी में उफनाई गंगा अब घाटों की सीढ़ियों से उतर चुकी है, बाढ़ का कहर थमने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोग बाग अपने घरों को संवारने में जुटे है. बाढ़ के पानी में हालांकि सैकड़ों कच्चे मकान जमीदोज हो चुके हैं, हजारों एकड़ कृषि योग्य जमीन पर खड़ी फसलें बाढ़ में बह गई हैं. खेतों में मेड़ें गुम हो चुकी है, कई इलाकों में मृत पशुओं के शव दुर्गंध फैला रहे हैं, जबकि गांव की पगडंडी दलदली होने के कारण उसमे चलना फिरना दूभर है.
मंगलवार को भोजन पैकेट से भरे वाहनों को खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार और एडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. दुबहर एवं बेलहरी शिक्षा क्षेत्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह के निर्देशन में भोजन पैकेट बनाने तथा बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है.
जिलाधिकारी ने एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिसकी आजीविका चली गयी है, उसे प्राथमिकता पर राहत सामग्री पहले दी जाए. मंगलवार को सोहांव ब्लाक से बेलसीपाह, बसंतपुर, गोविन्दपुर भरौली गांव के बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री दी जा रही थी.
28 अगस्त से शुरू हुआ था अभियान. उफनाती गंगा में कानपुर से वाराणसी तक 570 किलोमीटर तैरेगी नन्ही जलपरी. 200 किलोमीटर तैर कर मानिकपुर पहुंची. 13 साल की श्रद्धा शुक्ला गंगा की उफनती लहरों के बीच कानपुर से वाराणसी तक का सफर तय कर नया रिकॉर्ड बनाने के सफर पर रविवार को रवाना हुई थी.
बीसीडीए के अध्यक्ष आनन्द सिंह के नेतृत्व में जिले के दवा दुकानदारों मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पीके सिंह के अनुरोध पर बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ जनित रोगो के इलावा बुखार, सर्दी आदि की ओषधियों और भोजन के पैकेट व फल आदि का एकजुट होकर दवा व्यवसायियों ने बाढ़ पीड़ितों के बीच वितरित किया.
सोमवार को लाइफ लाइन संस्था के सहयोग एवं चैम्बर आफ कामर्स के संयोजकत्व में जनपद में आए भीषण बाढ़ के कारण त्रासदी झेल रहे बाढ़ पीड़ितों के लिए आट, दाल, चावल, चूड़ा, गुड़ एवं साथ ही कुछ दवाइयों के रूप में 4000 पैकेट स्थानीय एनडीआरएफ की टीम को सुपुर्द किया गया.
इस बाढ़ से पलिया खास की 7500 आबादी बुरी तरह प्रभावित है. सभी विस्थापित हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक मात्र 250 तिरपाल ही उपलब्ध कराये गये हैं. कहा कि विगत 27 अगस्त को हेलीकॉप्टर द्वारा जो राहत सामग्री गिराई गई थी, उसे दबंगों ने हथिया लिया. पीड़ितों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई. जिससे उनमें काफी आक्रोश है. इस अवसर पर पलिया खास के वर्तमान प्रधान सत्येन्द्र गोंड़, सहित काफी संख्या में बाढ़ पीड़ितो में राहत सामग्री की बाट जोह रहे है. – शिवनारायण यादव (पलिया खास के पूर्व प्रधान )
जिलाधिकारी ने एसडीएम को निर्देश दिया कि जो कोटेदार बाढ़ प्रभावित गांव में राशन आदि का वितरण नहीं करता है तो उसके कोटे की दुकान को तत्काल निलम्बित कर दिया जाय. राशन आदि का उठान न होने पर ग्राम प्रधान के विरूद्ध भी कार्रवाई की जाए.
बाढ़ पीड़ितों के सेवार्थ बेसिक शिक्षा विभाग का लंगर व भोजन पैकेट वितरण का कार्यक्रम सोमवार को भी जारी रहा.
धनीपुर से हल्दी तक बने रिंग बंधे को और मजबूत बनाया जाएगा. राज्य सरकार इस मुद्दे पर बात कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि बाढ़ की विभीषका से स्थाई तौर पर बचा जा सके. ऐसा कहना है प्रदेश के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री नारद राय का. सोमवार को श्री राय बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर थे.
हल्दी थाना क्षेत्र अंतर्गत गंगापुर गांव में सोमवार को राशन बांटने के दौरान बाढ़ पीड़ितों के हमले में हल्दी थाने का एक सिपाही और लेखपाल घायल हो गया.
जिला प्रशासन, समाजसेवी संस्थाओं तथा कुछ अन्य लोगों के व्यक्तिगत प्रयास से बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, लेकिन इस भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगो की संख्या इतनी ज्यादा है कि अब भी तमाम सुदूर क्षेत्रों मे राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है, जिससे लोगो में आक्रोश है.
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जिलाधिकारी गोविन्द राजू एनएस के निर्देशन में बाढ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्य तेजी से किया जा रहा है. रविवार तक 206 गांवों की कुल 02 लाख 85 हजार 640 जनसंख्या तथा 16115 पशु बाढ़ से प्रभावित हुए है.
दुबेछपरा रिंग बंधा टूटने के बाद आसपास के प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने में सैनिक स्कूल घोड़ाखाल (नैनीताल) के पूर्व छात्र भी उत्तर गए हैं.
बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राहत का मरहम लगाने का अभियान निरंतर चल रहा है. रविवार को बीएसए डॉ. राकेश सिंह भोजन पैकेट, हलवा, ब्रेड, बिस्कुट, टॉफी के साथ मिनरल वाटर की बोतलें बाढ़ से घिरे दर्जनों गांवों में नाव से जाकर वितरित किया