22-23 अगस्त 1942 की रात ब्रिटिश सेना ने बलिया पर फिर कब्जा कर लिया. इससे पहले बलिया पांच दिन तक आजाद रहा था. इसके बाद शहर और गांवों में गोलीबारी, लूट, आगजनी और क्रांतिकारियों पर अमानवीय अत्याचार का दौर चला, लेकिन बलियावासियों ने अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके.

