विद्यालय के प्रधानाचार्य संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि हमारे यहां छात्र छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और स्वास्थ्य शिक्षा भी प्रदान की जाती है.
गौरतलब है कि 1922 से नगवा में अनवरत रामलीला का मंचन ग्रामीणों के द्वारा किया जा रहा है, जिसके 100 वर्ष पूरे होने पर कमेटी के सभी नए तथा पुराने कलाकारों को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया.
लंका विजय के बाद भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाए जाने वाले इस पर्व के प्रति लोगों का उत्साह चरम पर था. दिन भर की साफ-सफाई के बाद शाम ढलते ही घरों और प्रतिष्ठानों में समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी व शुभ के देवता भगवान गणेश का पूरे विधि-विधान के साथ आह्वान किया गया.
चौक में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति की खरीदारी करते जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और एसपी एस आनंद. दुकानदार से मोलभाव कर दोनों अधिकारियों ने मूर्ति खरीदी,
दुकानों में नए-नए तरह की झालर, बर्तन और मूर्तियां बिकने के लिए पहुंची हैं. दुकानों में अच्छी-खासी चहलपहल देखने को मिल रही है. शाम होती ही बाजार ग्राहकों से भर जा रहे हैं.
अपने शिक्षा के नवीन कौशलों के शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर पर चयनित होकर जनपद का सम्मान प्रदेश स्तर पर बढ़ाई. इनके इस प्रदर्शन से पूरा बेसिक शिक्षा परिषद बलिया प्रफुल्लित है और सभी लोग बधाई दे रहे है.
शास्त्रीय आधार व मंदिर पुजारी ब्रजेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार इस मंदिर में देवी प्रतिमा की स्थापना मार्कण्डेय पुराण के अनुसार राजा सुरथ द्वारा की गई है जो चैत्र वंश में उत्पन्न हुए थे. उनका समस्त भूमंडल पर अधिकार था.
परन्तु मध्यकाल में इसमें उत्तरोत्तर विकृतियां आने लगीं, फलस्वरूप लोग कन्या को भार मानने लगे तथा बालपन में ही उसका विवाह करवा कर अपने कर्तव्य से मुक्त होने लगे. इससे समाज में अनेक समस्याओं का जन्म हुआ.
जहां गंगा स्नान के पश्चात लोग कलश स्थापना के लिए गंगा जी का मिट्टी लेकर अपने-अपने घरों तथा स्थलों पर पहुंच कलश स्थापना में लग गये.
नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मन्दिरों को आकर्षक रूप से सजाया गया है.
माता रानी के आशीर्वाद से यश प्राप्त करने वाले भक्तों ने धीरे धीरे मंदिर को भव्य बनाना शुरू किया. आज मातारानी का मंदिर पूरी भव्यता से एन एच से सटे कपुरी गांव की शोभा बढ़ा रहा है.
बहरवासू: मिलिये झुग्गी के बच्चों को पढ़ानेवाली बलिया की बेटी और बहू गीता मिश्रा से
शिक्षक दिवस के मौके पर हम आपकी मुलाकात करा रहे हैं गीता मिश्रा से. बलिया की रहनेवाली गीता मिश्रा की पढ़ाई लिखाई तो पश्चिम बंगाल में हुई है, लेकिन उनका मायका और ससुराल दोनों बलिया में ही है.
कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कृति ” गोदान ” का सजीव मंचन
– बाहर बरसते रहे बादल अंदर बजती रही तालियां
– कल यही कलाकार फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्री बनेंगे कौशिकेय
रसड़ा (बलिया). नगर में विश्व हिंदू एवम बजरंग दल एवम स्थानीय लोगों ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई. हाथी, घोड़े, गाजे- बाजे से निकाली गई रथ यात्रा भक्ति गीतों एवम भक्तो के जयकारों से पूरा नगर ही भक्ति मय रहा.
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