इस बार बलिया की धरती पर बाढ़ का पानी इतना फैल गया कि असर त्योहार पर भी दिखा. नदियों ने अपने किनारे तोड़े और पानी कई गांवों के घरों में घुस गया, सड़क, रास्ते पानी में डूब गए।
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बतकही – कुछ और नहीं, बलिया लाइव का ब्लॉग है. यहां आप विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बातें सुन सकते हैं.
इस बार बलिया की धरती पर बाढ़ का पानी इतना फैल गया कि असर त्योहार पर भी दिखा. नदियों ने अपने किनारे तोड़े और पानी कई गांवों के घरों में घुस गया, सड़क, रास्ते पानी में डूब गए।
फेफना थाना क्षेत्र के मटिही गांव के समीप सोमवार की सुबह ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आने से 14 वर्षीया संजना भारती पुत्री राजेंद्र भारती निवासी मटिही की छात्रा की मौत हो गई.
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बलिया द्वारा शीतलहर से बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें” आदि के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी गई है.
यह जानकारी अपरजिलाधिकारी डी.पी सिंह ने दी है. बताया कि- शीतलहर से बचाव के लिए
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जनपद में मतदान प्रतिशत बहुत ही कम है जो लगभग 54% हैं. उन्होंने बताया कि इस बार 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और दिव्यांग लोगों के लिए घर पर भेज कर मतदान करने की व्यवस्था थी जिनमें से 80 वर्ष से अधिक 483 लोगों ने वोट डाला. जबकि दिव्यांग लोगों में 204 लोगों ने वोट डाला. कुल 687 लोगों ने वोट डाला.
बलिया. पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति से युक्त होनी चाहिए. पत्रकारिता समाज का आईना है, इसलिए एक पत्रकार को हमेशा निष्पक्ष होना चाहिए. आदि पत्रकार महर्षि नारद जी की जयंती सप्ताह के समापन के अवसर शुक्रवार को …
(मोहन सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार) कवनों विपति के समय लोगन के सामने कवना तरह के मुसीबत आवेला ओकर बहुत जीवंत वर्णन गोस्वामी तुलसीदास जी एगो कवित में कइले बानी,,,,. खेती न किसानी को भिखारी …
ग्रामीण जीवनशैली, सोच और खेत-खलिहान में आधुनिकता दबे पांव अपना पैर पसार रही है. जब उत्पादन की प्रक्रिया बदलेगी तो उसका असर रहन-सहन पर भी पड़ेगा. हम पुरानी सोच के साथ नहीं रह सकते …
इस पुस्तक को पढ़ने पर यह ज्ञात हुआ कि बेल्थरारोड का बगावत कितनी ताकतवर रही, लोगों ने स्टेशन तक फूंक डाला, माल गाड़ी लूट ली, पोस्ट ऑफिस, उभांव थाने तक पर कब्जा कर लिया
बलिया से उठा, बलन्दी छू गया. ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता चेहरा, अब नहीं दिखेगा न सियासत में न ही समाज में, क्योंकि ऐसे लोग अब कैसे बनेंगे, जब उस विधा का ही लोप हो गया है, जो विधा चंद्रशेखर को गढ़ती रही
आज गुरु पूर्णिमा है और मुझे याद आ रहे हैं अपने गांव के मिडिल स्कूल के रामजी पंडित. याद आ रही उनकी छड़ी बरसाने की कला और लात- घूंसों से ठुकम्मस का वह अंदाज कि आज भी पुरवा चलती है तो पोर पोर परपराने लगता है.
छह माह से सिकन्दरपुर के पिलुई, गौराबगही मनियर के पास लगभग पचास मीटर लम्बी धंसी सड़क पर छोटे बड़े वाहनों के फंसने से लगातार जाम लग रहा है.
वर्तमान समय में लॉकडाउन के प्रभाव से पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र के सभी अवयव (कारक) अपने प्राकृतिक परिवेश में स्वतंत्र रूप से विकसित होकर तथा पुष्पित एवं पल्लवित होकर पूरे निखार पर हैं.
स्वाधीनता आंदोलनकारियों के लिए उर्वरा माटी बागी बलिया के सागरपाली की धरती पर जन्म लिए थे गौरी भईया. समाजवादी संत परम्परा के मूर्धन्य विभूति पूर्व मंत्री स्वर्गीय गौरी भईया की आज पुण्यतिथि है.
कोरोना वायरस की जंग में लड़ने के लिए प्रभावशाली ढंग से समय रहते हमारे प्रधानमंत्री ने प्रयास शुरू कर दिया. उनकी एक अपील पर पूरे देश की जनता ने विश्वास कर लॉकडाउन को सफल बनाया.
आज 2 मई है, शारदानंद अँचल में आस्था रखने वाले लोगों के लिये यह तारीख अति महत्वपूर्ण है. पूर्वांचल के समाजवादियों के लिए यह दिन 12 अक्टूबर से कम मायने नहीं रखता, जहां एक तरफ देश ने 12 अक्टूबर को लोहिया को खोया था वहीं 2 मई को बलिया ने अपना होनहार बेटा खोया था.
विकास कार्य के नाम पर की गयी घोषणा हकीकत के धरातल किस रूप में आयेगी यह महत्वपूर्ण बात है. केवल घोषणाओं और योजनाओं से कहीं काम चलता है.
लेखन-साहित्य जगत में डॉ जनार्दन राय जी जैसी शख्सियतों की शिनाख्त ही बलिया की खांटी माटी से होती है… ‘गांव क माटी’ उनकी एक कृति भी है….
सुनियोजित रणनीति के तहत वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए देवीलाल का नाम बैठक में शुरू में ही प्रस्तावित कर दिया…. क्योंकि वीपी आश्वस्त थे कि अगर संसदीय दल को नेता चुनने की छूट दी गई तो चंद्रशेखर भारी पड़ेंगे…
पानी ही हमारे लिए तीर्थ है…… मातृस्वरूपा है…. अगर उस पानी को बचाने के लिए हम समय रहते नहीं चेते तो खामियाजा आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी….. हमारी पीढ़ी को इतिहास नदियों के सामूहिक संहारक के रूप में याद करेगा…..
तटवर्ती गांवों के लोगों की आंखों के सामने उनके आशियाने ध्वस्त होते रहे, खून-पसीने से उपजायी फसलें उनकी आंखों के सामने पानी में डूबती रहीं.