19 अगस्त 1942, आज ही के दिन बलिया हुआ था स्वाधीन

बैरिया मैं तिरंगा फहराने तथा पुलिस फायरिंग में भारी संख्या में लोगों के शहीद होने के बाद जहां ब्रिटिश हुकूमत घबरा गई थी, वहीं पर बलिया के बच्चे, बूढ़े, जवान सभी में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ बगावत कूट-कूट कर भर गया था.

आठ अखाड़ों के बजरंगियों ने छुड़ाए पसीने

बलिया में महावीरी झंडा जुलूस करतब प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में बजरंगी शामिल हुए. विष्णुपुर मस्जिद से अखाड़ों को पास कराने में जिला प्रशासन का पसीना छूट गया.

बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा

जिले में सुबह से ही रक्षा बंधन की धूम रही. बहनों ने भाइयों के कलाइयों पर राखी बांध जीवनभर रक्षा करने का बचन लिया, वहीं भाइयों के सलामती के लिए भगवान से दुंआ मांगी.

लाठियों संग हैरतअंगेज प्रदर्शन, योगी रहे मुख्य आकर्षण

श्रीनाथ मठ पर लाखों श्रीनाथ भक्तों ने लाठियों द्वारा शक्ति प्रदर्शन कर अपने इष्ट देव को प्रसन्न किया. लाठियों के संगम से पूरी नाथ नगरी गुंजायमान रही.

जॉर्ज पंचम की ताजपोशी के विरोध में निकला महावीरी झंडा जुलूस

जंगे आजादी में युवाओं के योगदान, छात्र शक्ति राष्ट्र शक्ति की बानगी है बलिया का महावीरी झंडा जुलूस. ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर पांडुलिपि संरक्षण मिशन के जिला समन्वयक शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि ब्रितानी गुलामी के अमंगल को मिटाने के लिए प्रथम बलिदानी मंगल पांडेय की धरती पर उनकी बगावत के 52 साल बाद जॉर्ज पंचम की ताजपोशी के विरोध में महावीरी झंडा जुलूस की शुरुआत हुई थी.