गौरतलब है कि 1922 से नगवा में अनवरत रामलीला का मंचन ग्रामीणों के द्वारा किया जा रहा है, जिसके 100 वर्ष पूरे होने पर कमेटी के सभी नए तथा पुराने कलाकारों को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया.
गौरतलब है कि 1922 से नगवा में अनवरत रामलीला का मंचन ग्रामीणों के द्वारा किया जा रहा है, जिसके 100 वर्ष पूरे होने पर कमेटी के सभी नए तथा पुराने कलाकारों को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया.
परी मस्ताना, जो मंच पर प्रस्तुत झांकियों में कभी राधा तो कभी पार्वती के रूप में अपना दायित्व निभाता है