दो बेटियां थी बिना जांचे-परखे जैसे-तैसे बियाह कर दिए…अब उ बेचारिन के का गलती जो ससुराल में नौकरानी बन के जी रही है, दो बेटों में एक कमाने सूरत भाग गया.
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बतकही – कुछ और नहीं, बलिया लाइव का ब्लॉग है. यहां आप विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बातें सुन सकते हैं.
दो बेटियां थी बिना जांचे-परखे जैसे-तैसे बियाह कर दिए…अब उ बेचारिन के का गलती जो ससुराल में नौकरानी बन के जी रही है, दो बेटों में एक कमाने सूरत भाग गया.
कद काठी से हल्के फुल्के थे ही, मगर उनकी यह हरकत प्रेमचंद की ‘बूढ़ी काकी’ की याद दिला रही थी कि ‘बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरामन होता है.’
अब हमारी सुरक्षा की जिम्मेवारी केवल फोर्स पर है…. फोर्स ही हमें हर आपदा से बचा रही है… सीमा से लेकर गांव तक…. क्योंकि हमारी बाकी प्रतिरोधक मशीनरी… गवर्नेंस कुंद पड़ गई है…
दियारे पर दो-तीन दशक पहले घनी आबादी वाले गांव थे, जिनमें पचासों हजार की आबादी बसी हुई थी.अचानक गंगा ने अपना रास्ता बदला और ये गांव उसमें समाते चले गए.
मुख्यमंत्री का आदेश था कि कोई भी बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे नहीं रहे… मगर तादाद इतनी ज्यादा है कि सभी को छत की ओट नसीब नहीं हुई….
दुबेछपरा रिंग बांध को बनाने में जितनी लागत आई थी, उससे डेढ़ या पौने दोगुना उसे बचाने की कवायद में जाया हो चुका है. खुद बैरिया विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह का दावा है 29-30 करोड़ रुपये उनकी सरकार ने बांध को बचाने पर खर्च किया, मगर लोगों को प्राकृतिक आपदा से बचाने में विफल रहे. ऐसे में कई सवाल किसी भी संवेदनशील आदमी के दिमाग में कौंध सकते हैं.
सम्मानित होने के लिए लोग समारोह स्थल पर पहुंचे. अंग्रेजी में हस्ताक्षर देख आयोजक ने कहा कि हिन्दी में हस्ताक्षर न करने पर पुरस्कार वापस ले लिये जायेंगे.
दीप तले अंधेरे की कहावत चरितार्थ करता है इनका अपना घर, अपना इलाका. क्या वजह है कि यहां की प्रतिभाएं अन्यत्र रंग दिखाती हैं, जबकि यहां लाचार दिखती हैं? ये सवाल अब भी अनुत्तरित है.
क्या आपने कभी सुना है कि फलां मेट्रो पैसेंजर को फांसी हुई इसके बाद लोग कांशस हो गए…. नहीं न…
एक तरफ तो वहां स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा है और दूसरी तरफ प्रतिबंध भी कायम है. अब प्रतिबंध न हटाने के लिए पाकिस्तान को ढाल बनाया जा रहा है.
मेरी टेंशन की वजह दूसरी भी थी. जिस मकान में हम रह रहे थे, वह यूपी कॉलेज के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर का मकान था. इलाके में भी सम्मानित लोग थे
चंद्रयान 2 का इसरो सेंटर से संपर्क टूटने पर हताश वैज्ञानिकोंं के काम की सराहना और जज्बे को सलाम किया. उनके परिवार के मौन समर्थन का आभार जताया.
कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी था. जो शिक्षक विजेता का नाम पुकार रहे थे वे लगातार दर्शकों की राय भी पूछते जा रहे थे. कुछ हो-हो की आवाज़ों और तालियों के बीच सभी लोग पुरस्कार ले कर जा रहे थे. सभी लोग विजेता का नाम चिल्ला रहे थे
मैडम ने कहा जब तक जरूरी न हो विद्यादान के पैसे नहीं लेने चाहिए. मैडम की यह बात हम बच्चों के दिल को छू गयी. दुलारी मैम आज भी हमारे दिल में बसी हैं. आप जहां कहीं भी हों-हैप्पी टीचर्स डे दुलारी मैडम.
शिक्षा की बेहतरी के लिए कितनी पुस्तकें हैं, कितने ही दार्शनिक सिद्धांतों और पद्तियों का आविष्कार किया गया. कितने धर्मों की स्थापना हुई और कितनी शिक्षा पद्तियां अपनाई गईं. लेकिन वो सभी शिक्षा पद्तिया सही मायनों में असफल हो गईं.
तमाम ट्रे्ंड्स की तरह खुद को बतौर प्रोफेशनल और प्रैक्टकल पेश करना भी उसमें शुमार है. सेल्फ-अटेस्टेड होता है किसी का अपना परिचय. बस सतर्क होने की जरूरत है.
वो कुत्ता अपनी बीवी को इसलिए बेचने जा रहा था क्योंकि वो बहुत सुंदर थी. भई वाह! बीवी खूबसूरत हो तो कोठे बेच देंगे, बदसूरत हो तो घर से बाहर खदेड़ देंगे… वाह. बीवी खूबसूरत हो तो कोठे पर बेचे देंगे, खूबसूरत न हो तो खुद कोठे कोठे घूमते फिरेंगे.
तुम्हारी दो कौड़ी की राजनीति और झंडा ढोने ने तुम्हारे पिता की हड्डियों को गला दिया, कल परिवार इस उम्मीद में था कि तुम पढ़ लिखकर दो पैसा लाते और बहन की शादी में पिता का सहयोग करते पर तुम सहयोग कहा से करते तुमने तो अपने खर्चे से उन्हें कर्ज में डाल दिया.
भृगु-दर्दर क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा को सभी देवी-देवता, पवित्र तीर्थ,नदियां आती हैं
फरेब व पाखंड में पारंगत हैं केन्द्र व प्रदेश सरकार, सजग रहें-नेता प्रतिपक्ष