पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति से युक्त होनी चाहिए -संघ

बलिया. पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति से युक्त होनी चाहिए. पत्रकारिता समाज का आईना है, इसलिए एक पत्रकार को हमेशा निष्पक्ष होना चाहिए. आदि पत्रकार महर्षि नारद जी की जयंती सप्ताह के समापन के अवसर शुक्रवार को आयोजित एक वेब संगोष्ठी में वक्ताओं ने उक्त विचार व्यक्त किए. “आपदा काल में सेवा और मीडिया” विषय पर इस वेब संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोरक्षप्रान्त के तहत आने वाले विश्व संवाद केंद्र, गोरखपुर की तरफ से किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग ने नारद जयंती सप्ताह शुरू किया था.

 

संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर संगोष्ठी के मुख्य वक्ता थे, जबिक गोरखपुर स्थित इंडिया ग्लाइकोल लिमिटेड के बिजनेस प्रमुख एस.के. शुक्ल ने उसकी अध्यक्षता की. इस मौके पर नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि जीवन के सभी क्षेत्रों में किसी न किसी को अपना प्रेरणास्रोत बनाना हमारी प्रवृति रही है. देवर्षि नारद जी की जयंती पर 30 मई 1826 को पंडित जुकुल किशोर सुकुल ने हिंदी पत्रकारिता का शुरुआत उदण्ड मार्तण्ड पत्र के प्रकाशन के साथ किया.

 

 

नारद जी निरन्तर भ्रमणशील रहे तथा चरैवेति चरैवेति के सिद्धांत को समाज के समक्ष रखा. नारद जी के भक्तिसूत्र व शिक्षाएं लोक कल्याणकारी हैं. नारद जी की सूचनाओ के पीछे लोकभावना का गुढ़ रहस्य छिपा रहता था.

 

 

ठाकुर ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसका मूल सिद्धांत निष्पक्षता होती है. समय के अनुसार पत्रकारिता में भी बदलाव आया है और अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं सोशल मीडिया के नए रूप में हमारे सामने है. इस संकट काल में समाज ने सेवा का बहुत बड़ा कार्य किया है. संघ ने भी सेवाकार्य में अपनी पूरी क्षमता लगा दी. संघ के स्वयंसेवकों द्वारा जरूरतमंद लोगों तक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई. टीकाकरण में सहयोगन किया गया. इस आपदाकाल में मीडिया ने भी अपनी महती भूमिका निभाई. इस संकट काल अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता और पत्रकारिता से जुड़े लोगों को श्रद्धांजलि भी दी.

 

 

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पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने कहा कि पत्रकारिता समाज का आईना होता है तथा समाज को अच्छे बुरे में भेद को स्पष्ट करता है.

 

 

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे एस.के. शुक्ल ने कहा कि पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति से युक्त होनी चाहिए. इसके सकारात्मक और नकारात्मक दो पहलू होते हैं, इसलिए शब्दों और चित्रों के चयन में बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए. सेवा को पवित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां सेवा है वहीं भगवान का निवास होता है.

 

संगोष्ठी का संचालन सिद्धार्थ ने किया. अतिथियों का परिचय प्रान्त प्रचार प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी तथा आभार सह प्रांत प्रचार प्रमुख शैलेष सिंह ने व्यक्त किया.

 

 

संगोष्ठी का जूम एप के साथ-साथ विश्व संवाद केंद्र गोरखपुर के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारण हुआ. संगोष्ठी से संघ के पदाधिकारियों के साथ ही समाज के अन्य गणमान्य लोग, प्रोफेसर, पत्रकारिता जगत के लोग, अधिवक्ता, चिकित्सक आदि लोग जुड़े थे.

(बलिया से कृष्मकांत पाठक की रिपोर्ट)