महर्षि पराशर मुनि के तपोभूमि पर लगा एक दिवसीय मेला
Category: लाइफ मंत्रा
हिंदी सप्ताहिक गोष्ठी का समापन
बलिया का नाम जुबान पर आते ही लोगों के जेहन में वहां की बड़की पुड़ी, पुरी, फुटेहरी (भउरी-चोखा) और सत्तुआ की याद आ जाती है. ज्यादा नहीं, एकाध पीढ़ी पहले जाइए, घरों में तैयार होने वाली विभिन्न मिठाइयां, जो बेटी-पतोह को तीज त्योहार पर भेजे जाते थे, भी दिमाग में तैरने लगती है.
मोहम्मद खलील की गायकी की मादकता, मिठास और उस की मांसलता की महक लोगों के मन में अभी भी तारी है. उन की मिसरी सी मीठी और खनकदार आवाज़ आज भी मन में जस की तस बसी बैठी है.
अमरनाथ मिश्र पी जी कालेज दुबेछपरा बलिया में हिंदी दिवस पर शुक्रवार के दिन “वर्तमान संदर्भ में हिन्दी की दशा एवं दिशा ‘ विषय पर संगोष्ठी
पुलिस-प्रशासन व सम्बन्धित विभाग समस्या के निदान को ततपर, आम आदमी भी करें सहयोग
युवाओं के करतब देख दंग रहे लोग
शान्ति समिति की बैठक में महाबीरी झंडा जुलूस की तैयारी पर चर्चा
सूरज के प्रकाश से ही पृथ्वी पर प्रकृति का चक्र चलता है. खेती के द्वारा अनाज और वर्षा के द्वारा जल की प्राप्ति हमें सूर्य देव की कृपा से ही होती है. सूर्य षष्ठी की पूजा भगवान आदित्य के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता को दर्शाने के लिए ही की जाती है.
रानीगंज में धूमधाम से मनाया गया संत गणिनाथ जन्मोत्सव
मेले और त्योहार एक-दूसरे से मिलने के अवसर होते है. प्राचीन समय में, जब संचार और परिवहन की कोई ऐसी सुविधाएं नहीं थीं, तो इन मेलों और त्यौहारों ने रिश्तेदारों और दूर दूर भौगोलिक स्थानों पर रहने वालों दोस्तों के साथ मुलाकात जेसे सामाजिक सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
बकौल विजय बहादुर सिंह “इसी भोजपुरी लिट्टी पर कवि नागार्जुन ने एक भरी पूरी और महत्वपूर्ण कविता ही लिख डाली है. कविता में लालू यादव जो उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री थे, एक अमेरिकन डेलीगेशन को लिट्टी-चोखा की दावत देते हैं और वह डेलीगेशन उसके स्वाद पर रीझ उठता है.
बलिया के महान सपूतो एवं सेनानियों के गांव में बने स्मारक और संग्रहालय
अपनी आवाज़ के बल पर काफी कम उम्र में भोजपुरिया समाज व भोजपुरी संगीत जगत में पहचान बनानी वाली, सबको मोहित कर देनी वाली 17 वर्षीय भोजपुरी कलाकार तीस्ता शांडिल्य आखिरकार ज़िन्दगी की जंग हार गई. दुआ के लिए उठे हजारों हाथ भी उसकी जिंदगी को नहीं लौटा सके. परिजनों व शुभचिंतकों की प्रार्थना नहीं काम आई.
शान्तिपूर्ण माहौल में निकला महावीरी झण्डा जुलूस
धूमधाम के साथ निकला बलिया का महावीरी झण्डा जुलूस
सेंगर वंशीय शौर्य के प्रतीक श्रीनाथ बाबा के परम्परागत वार्षिक पूजन में क्षत्रियों ने दिखाया दमखम
बलिया का वो पहला महावीरी झण्डा जुलूस जिसमें हमारे पूर्वज जगन्नाथ सिंह जूते के नोक पर जार्ज पंचम का तगमा जूते के फीते में बांध कर निकले थे
यह तिस्ता है. तिस्ता सिंह. छपरा की रहनेवाली. कम उम्र में ही सधी हुई कलाकार. अपने बड़े भाई तुल्य, बिहार के चर्चित कलाकार उदय नारायण सिंह की बिटिया. पटना एम्स में भर्ती है. बीमारी यह थी कि इसका बुखार जा नहीं रहा था.
सुखपुरा के अमर शहीदों को नमन कर अगराया बलिया, बच्चों में दिखा गजब उत्साह

