अयोध्या के सैन्य बल के साथ जिसदिन सायंकाल शत्रुघ्न जी वाल्मीकि आश्रम पहुँचते हैं, उसी रात्रि में सीता जी कुश – लव अपने जुड़वा पुत्रों को जन्म देती हैं.
अयोध्या के सैन्य बल के साथ जिसदिन सायंकाल शत्रुघ्न जी वाल्मीकि आश्रम पहुँचते हैं, उसी रात्रि में सीता जी कुश – लव अपने जुड़वा पुत्रों को जन्म देती हैं.
इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा रहे. रावण का पुतला दहन होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारे से गुंजायमान हो गया.