बलिया से हूं, हाईस्कूल, इंटर थर्ड डिविजन पास, क्या कंपनी में हेड बनाएंगे! जानिए ZOHO को-फाउंडर का जवाब

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बलिया. सोशल मीडिया पर खुद को बलिया का बताने वाले एक यूजर ने एक मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी ZOHO के को-फाउंडर, पूर्व सीईओ और चीफ साइंटिस्ट को अनोखे अंदाज में चैलेंज कर दिया. इस यूजर ने कहा कि ‘मैंने बलिया डिग्री कॉलेज से BA थर्ड डिवीज़न में पास किया है। इसके अलावा, 10वीं में मेरे 35% और 12वीं में 38% अंक आए थे। सर, क्या आप मुझे Zoho में ‘हेड ऑफ़ इंजीनियरिंग’ का पद दे सकते हैं’?

अब पूरा मामला समझिए. एक भारतीय मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी ZOHOहै जो क्लाउड-बेस्ड बिज़नेस सॉफ्टवेयर फील्ड की एक्सपर्ट है। इस कंपनी के को-फाउंडर, पूर्व CEO और मौजूदा चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू (Chief Scientist Sridhar Vembu) ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अन्य यूजर के ओपन लेटर पर अपना जवाब पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि वह मेरिट में उस तरह से विश्वास नहीं करते जैसे आप करते हैं. लिखा कि ‘मैं टैलेंट खोजने के तरीके के तौर पर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को पूरी तरह से खारिज करता हूँ’।

इसी पोस्ट का जवाब देते हुए खुद को बलिया का बताने वाले यूजर कुंभकरण @_kumbhkaran ने लिखा कि ‘’हेलो सर, यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि आप ‘कॉम्पिटिटिव मेरिट’ (प्रतिस्पर्धी योग्यता) में विश्वास नहीं रखते। मुझे यह बात बहुत पसंद आई।

सर, मैंने बलिया डिग्री कॉलेज से BA थर्ड डिवीज़न में पास किया है। इसके अलावा, 10वीं में मेरे 35% और 12वीं में 38% अंक आए थे। सर, क्या आप मुझे Zoho में ‘हेड ऑफ़ इंजीनियरिंग’ का पद दे सकते हैं?

दरअसल इस शख्स ने श्रीधर वेम्बू पर तंज कसते हुए अपनी बात कही क्योंकि इसे मेरिट पर श्रीधर वेम्बू की राय पसंद नहीं थी. जोहो कंपनी के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने एक्स यूजर कुंभकरण के इस पोस्ट का कोई सीधा जवाब नहीं दिया लेकिन इस पोस्ट का संज्ञान लेते हुए ऐसा पोस्ट लिखा जिसे जानना बलिया वालों के लिए दिलचस्प होगा.. उन्होंने बताया कि वह बलिया को अच्छी तरह से जानते हैं और बलिया में रह भी चुके हैं और आगे बलिया के लिए उन्होंने कुछ सोचा भी हुआ है।

उन्होंने लिखा  ‘इस व्यंग्यात्मक ट्वीट में, उन्होंने मुझ पर निशाना साधने के लिए बलिया (उत्तर प्रदेश) का इस्तेमाल एक तंज के रूप में किया है। संयोग से, मैं बलिया जा चुका हूँ और वहाँ करनई गाँव में मेरे अच्छे मित्र डॉ. विजय तिवारी के परिवार द्वारा संचालित DSET पब्लिक स्कूल को हम सपोर्ट करते हैं। मैंने पिछले वर्ष वहाँ एक दिन बिताया था।

हम बलिया में एक केंद्र खोलने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन हमारी AI परिवर्तन प्रक्रिया के कारण इसमें देरी हो गई। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी (जो अच्छी तरह चल रही है), हम बलिया पहुँचेंगे। उस समय हम अपनी कार्यशैली के अनुसार बलिया के स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों का चयन करेंगे और उन्हें प्रशिक्षित करेंगे।

हमें अंकों (grades) से कोई मतलब नहीं है। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि आपके अंदर कितना उत्साह और जुनून है। भारत के हर जिले में, खासकर ग्रामीण और उपेक्षित क्षेत्रों में, अपार प्रतिभा मौजूद है, जिसे पहचानने की आवश्यकता है। उस प्रतिभा को सामने लाना ही दुनिया का सबसे बड़ा उद्यमी अवसर है’।

इस पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने स्पष्ट किया कि मेरिट में विश्वास नहीं रखना कहने का उनका तात्पर्य अंकों या ग्रेडिंग फर्स्ट, सेकेंड या थर्ड जैसी डिविजन के आधार पर चयन से है। उन्होंने कहा कि भारत में खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में अपार प्रतिभा है जो इस ग्रेडिंग सिस्टम या डिविजन के सिस्टम में आ ही नहीं पाती। उसे पहचान कर सामने लाने की जरूरत है.

कौन हैं श्रीधर वेम्बू और जोहो कंपनी?

Zoho एक जानी-मानी भारतीय मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी है जो क्लाउड-बेस्ड बिज़नेस सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में एक्सपर्ट और और बहुत सारे सॉफ्टवेयर निर्माण कर चुकी है। इसका मुख्यालय चेन्नई, भारत में है, यह दुनिया भर में लाखों यूज़र्स को सेवा देती है और कई देशों में इसके दफ़्तर हैं। श्रीधर वेम्बू कंपनी के को-फाउंडर, पूर्व CEO और मौजूदा चीफ साइंटिस्ट हैं. कंपनी ऑर्गेनिक ग्रोथ, गहरी रिसर्च और बड़े शहरों के केंद्रों से बाहर मौके बनाने पर ज़ोर देती है, जिसमें टैलेंट को ट्रेनिंग देने के लिए Zoho University जैसी पहलें शामिल हैं।

श्रीधर वेम्बू एक दूरदर्शी उद्यमी हैं और Zoho की अनोखी कॉर्पोरेट संस्कृति और सफलता के पीछे की मुख्य शक्ति उन्हें माना जाता है। वर्ष 1968 में तमिलनाडु में जन्मे श्रीधर ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में PhD की है। उन्होंने अमेरिका में अपने करियर की शुरूआत की। उन्होंने 2000 से 2024 तक CEO के तौर पर काम किया, पारिवारिक मूल्यों, किसी को नौकरी से न निकालने और ग्रामीण सशक्तिकरण पर आधारित एक कंपनी बनाना उनका मुख्य फोकस रहा. बाद में उन्होंने अपनी भूमिका में बदलाव करते हुए Chief Scientist के तौर पर काम करना तय किया ताकि वे रिसर्च और डेवलपमेंट, खासकर AI पर ध्यान दे सकें। उन्हें यह साबित करने के लिए भी हचाना जाता है कि भारत से ही बिना किसी बाहरी फंडिंग के एक ग्लोबल, कई अरब डॉलर की सॉफ्टवेयर कंपनी बनाई जा सकती है।

बहरहाल प्रतिस्पर्धी योग्यता, अंक या ग्रेडिंग सिस्टम और जिस तरह के टैलेंट की बात श्रीधर वेम्बू कह रहे हैं, उस पर आप क्या सोचते हैं, अपनी राय आप कमेंट के जरिए बता सकते हैं.

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