Skip to content
22 October, 2026
  • Youtube
  • Facebook
  • Whatsapp
  • X
  • Instagram
  • Linked In
  • Telegram
  • Threads
ballia live

Ballia Live | Hindi News, India & World News

ना TV, ना अख़बार… बस खांटी समाचार

IMG_2456
https://youtu.be/NbuRlLVVtG0?si=jSohAK1hkRlbjnql
https://youtu.be/u-hTDfCu66I?si=-zshHn9S3G0_F2bx
Primary Menu
  • जिला जवार
  • UP लाइव
  • CRIME डायरी
  • Campus रिपोर्ट
  • स्क्रीन TASTE
  • स्पेशल/Exclusive
  • ELECTION लाइव
  • बहरवासू
  • देश दुनिया
बलिया LiVE Videos
  • Home
  • लाइफ मंत्रा
  • आत्मीय और जीवंत कथाकार थे अमरकांत
  • ब्रेकिंग न्यूज
  • लाइफ मंत्रा

आत्मीय और जीवंत कथाकार थे अमरकांत

अमरकांत अत्यंत आत्मीय कथाकार, उपन्यासकार थे. उतने ही सहज और पारदर्शी. उनकी रचनाएं दिल को छू कर देर तक दिमाग पर छाई रहती हैं. अमरकांत की अनुपस्थिति से रिक्तता का बोध होना स्वाभाविक है. वे प्रेमचंद की परंपरा के कथाकार थे. उन्होंने उस समय अपनी पहचान बनाई जब नई कहानी आंदोलन जोर पकड़ चुका था.
News Desk 1 July, 2018 1 minute read
AMARKANT

विनय बिहारी सिंह (वरिष्ठ पत्रकार / कहानीकार)

अमरकांत अत्यंत आत्मीय कथाकार, उपन्यासकार थे. उतने ही सहज और पारदर्शी. उनकी रचनाएं दिल को छू कर देर तक दिमाग पर छाई रहती हैं. अमरकांत की अनुपस्थिति से रिक्तता का बोध होना स्वाभाविक है. वे प्रेमचंद की परंपरा के कथाकार थे. उन्होंने उस समय अपनी पहचान बनाई जब नई कहानी आंदोलन जोर पकड़ चुका था. नई कहानी आंदोलन प्रेमचंद की परंपरा का प्रकारांतर से विरोध करते हुए दौड़ रहा था. नई कहानी का नायक शहरी (गांव या कस्बे का नहीं) , व्यक्ति केंद्रित था और इसमें स्त्री- पुरुष संबंधों की भी प्रमुखता दी जाती थी. नई कहानी आंदोलन के केंद्र में थे मोहन राकेश, कमलेश्वर और राजेंद्र यादव, लेकिन अमरकांत प्रेमचंद की धारा को आगे बढ़ाते रहे. पूरी मजबूती और प्रमुखता के साथ. अमरकांत मेरे गृह जनपद बलिया ( उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी थे. इसलिए मैं अपने युवा दिनों में उनके इलाहाबाद के आवास पर जाता रहता था. उनसे बातचीत कर बहुत सुख मिलता था, क्योंकि उनके जैसा सहज विद्वान व्यक्ति मैंने बहुत कम देखे हैं. उनकी हंसी और बातचीत में एक मिठास थी.

वे किसी भी पुरस्कार से बड़े थे. हालांकि उन्हें उनके उपन्यास – इन्हीं हथियारों से- के लिए 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 2009 में व्यास सम्मान मिल चुका था. ज्ञानपीठ पुरस्कार भी 2009 में ही मिला. लगभग इसी के आसपास सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला था. उनकी कहानियां- डिप्टी कलक्टरी, दोपहर का भोजन, जिंदगी और जोंक और हत्यारे एक बार पढ़ लेने के बाद भूलती नहीं हैं. भीतर ही भीतर उसके पात्र आपके चिंतन में हस्तक्षेप करते रहते हैं. वे अपने साथ आपको बहा ले जाते हैं. दोपहर का भोजन में सिद्धेश्वरी देवी अपने उपेक्षित पति और बेरोजगार बेटों को आधा पेट से भी कम भोजन देती हैं. जाहिर है किसी का पेट नहीं भरता. सबके भोजन के अंत में वे देखती हैं कि उनके लिए सिर्फ आधी रोटी बची है. सिद्धेश्वरी देवी चुपचाप रोती हैं. उनका रोना पाठक को अतल गहराई तक हिला देता है.

सन उन्नीस सौ अस्सी के आसपास जब मैं उनसे इलाहाबाद में मिला तो वे सोवियत संघ (जिसे हम लोग बोलचाल में रूस कहते थे) की राजधानी मास्को की यात्रा से लौटे थे. उन्होंने एक दिलचस्प बात कही. स्नान के बाद समस्या थी कि भींगी तौलिया कहां फैलाई जाए. कहीं कोई अरगनी या रस्सी जैसी कोई चीज थी नहीं. तो उन्होंने गरम पानी के पाइप पर ही उसे फैला दिया. शाम तक सूख गई. इस तरकीब पर मैं और वे खूब हंसे. साहित्य की बातें भी वे इसी सहजता से कहते, बताते थे. उस दिन मैंने उनके यहां पराठा और सब्जी का जलपान किया और चाय पी. सुबह टहलने के लिए उन्होंने एक बहाना ढूंढ़ लिया था. वे उन दिनों ग्वाले से दूध लेने स्वयं जाते थे. ग्वाला स्वयं दूध दे सकता था या घर के ही लोग ले आ सकते थे. यह कोई समस्या नहीं थी. लेकिन वे सुबह ग्वाले के यहां जा कर दूध ले आते थे. कहते थे- जरा टहलना हो जाता है. लेकिन कई बार मुझे लगता था कि वे अपने कथा पात्रों से अचानक ऐसे ही मिलते थे. उन दिनों वे अपना उपन्यास- सुन्नर पांड़े की पतोहू- लिख रहे थे. उपन्यास में ढोलक की ध्वनि- कुदरबेंट, कुदरबेंट का उल्लेख अत्यंत मोहक ढंग से किया गया था. उपन्यास की भाषा- शैली और इसके संवाद समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के हृदय को छू रहे थे ( इस उपन्यास का अंश किसी पत्रिका में छप चुका था और इसकी खूब चर्चा हो रही थी). इस उपन्यास पर हम देर तक बातचीत करते रहे. उन दिनों वे अस्वस्थ थे. फिर भी उनकी मोहक हंसी जस की तस बरकरार थी. जहां तक याद पड़ता है- उनकी रीढ़ में दर्द था. वे बीच- बीच में लेट जाते थे. थोड़ी देर बात दिल्ली के लिए मेरी ट्रेन थी. मैं इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के लिए चल पड़ा था.

एक जुलाई 1925 को जन्मे कथाकार, उपन्यासकार अमरकांत 17 साल की आयु के थे, तो महात्मा गांधी के- अंग्रेजों भारत छोड़ो – आंदोलन में कूद पड़े थे. जब वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे तो उनका संपर्क आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण से हुआ. उनकी जनपक्षधरता और मजबूत हुई. उनके भीतर का लेखक और धारदार हुआ. महात्मा गांधी के आंदोलन- करो या मरो- का प्रभाव बलिया पर तो था ही यह फैल कर महाराष्ट्र के सतारा और पश्चिम बंगाल के मिदनापुर तक फैला हुआ था. इसी आंदोलन पर केंद्रित उनका उपन्यास- इन्ही हथियारों से- अत्यंत रोचक है. इतिहास को कथा में पिरो कर अमरकांत ने अद्भुत प्रयोग किया है. पाठक एक बार पढ़ना शुरू करता है तो उसे खत्म करके ही छोड़़ता है. हालांकि उनके अन्य उपन्यास- काले उजले दिन, सुखजीवी, सूखा पत्ता, सुन्नर पांड़े की पतोहू आदि भी अत्यंत रोचक हैं.

अमरकांत के पात्रों का संवाद पाठक को मथते रहते हैं। हत्यारे के दो युवक कोई कामधाम नहीं करते. सिर्फ बड़ी- बड़ी बातें करते हैं. वे एक गरीब स्त्री का शारीरिक शोषण करते हैं और उसकी मजदूरी डकार जाते हैं. वे एक दूसरे से डींग हांकते हैं कि जवाहर लाल नेहरू और जान एफ कैनेडी से उनकी गहरी आत्मीयता है. प्रधानमंत्री का पद तो उन्हें सबसे पहले प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया. अराजक इतने कि अपना पीछा करने वाले एक युवक की हत्या तक कर देते हैं. हमेशा की तरह एक रात जब वे दारू पी रहे होते हैं तो एक युवक कहता है- मैं सोचता था कि जब मैं प्रधानमंत्री बनूंगा तो तुम्हें भ्रष्टाचार और जातिवाद विरोधी समिति का प्रेसिडेंट बना दूंगा. लेकिन तुम सिर्फ इतनी कम दारू पीओगे तो अधिकारियों से घूस कैसे लोगे? चार सौ बीसी कैसे करोगे? झूठ कैसे बोलोगे? तुम देश की सेवा करने लायक नहीं हो.

अमरकांत हमेशा जनता के साथ, या कहें आम आदमी के साथ खड़े रहते थे. उनका लेखन विसंगतियों पर लगातार चोट करता है. लेकिन हम हिंदी वाले अपने लेखकों को जल्दी भुला भी देते हैं. बंगाल में तो लेखकों की जन्मतिथि या पुण्यतिथि पर इकट्ठा होने और उनके लेखन के बहाने देश की व्यवस्था पर बातचीत करने की परंपरा अब भी बाकी है. लेकिन हिंदी भाषी प्रदेशों में यह परंपरा खत्म होती जा रही है. इसे कैसे पुनज्जीवित किया जाए, इस पर मंथन की जरूरत है. लेखक के माध्यम से व्यवस्था पर बातचीत, मंथन और आम आदमी के सरोकार ही तो हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं.

अमरकांत लंबे समय तक इलाहाबाद के मित्र प्रकाशन में संपादक के रूप में कार्यरत रहे. देखा जाए तो वे आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं थे. लेकिन दिल के धनी थे. एक बार कोई उनसे मिल ले तो उन्हें भूल नहीं सकता. ऐसे अपने लगने वाले साहित्यकारों की पीढ़ी के वे प्रमुख व्यक्ति थे. किसी युवा लेखक या पत्रकार को सिफारिशी चिट्ठी लिखनी हो तो वे झट तैयार हो जाते थे. उनकी वजह से किसी का कुछ भला हो जाए तो उन्हें बहुत अच्छा लगता था, ऐसे लोगों की संख्या क्या धीरे- धीरे कम हो रही है?

Tags: साहित्य

Post navigation

Previous: शशिभूषण दुबे मंडल अध्यक्ष व संजय सिंह प्रदेश मंत्री के पद पर मनोनित
Next: फर्जी एसडीएम बन कर जालसाजी में लिप्त युवक चढ़ा पुलिस के हत्थे

ये भी पढ़ें

Belthra Hansia Attack 4
  • CRIME डायरी
  • जिला जवार
  • बेल्थरा रोड
  • ब्रेकिंग न्यूज

Ballia Breaking News: बेल्थरारोड क्षेत्र में तीन किशोरों पर धारदार हंसिया से हमला, गंभीर होने पर दो जिला अस्पताल रेफर

General Desk 7 September, 2026
haldi truck accident
  • Accident
  • जिला जवार
  • ब्रेकिंग न्यूज

Ballia News: थाने से 20 मीटर दूर हल्दी में ट्रकों की टक्कर, केबिन में फंस गया था ड्राइवर

Central Desk 27 July, 2026
road accident Symbolic
  • Accident
  • Front Page
  • जिला जवार
  • ब्रेकिंग न्यूज

Ballia-दो मोटरसाइकिलों की सामने से टक्कर, हादसे में एक व्यक्ति की मौत, दो लोग घायल

General Desk 22 July, 2026

Recent Posts

  • शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए चार केंद्रों पर होगा मतदान, 5357 मतदाता देंगे वोट
  • पांच दशक पहले शिक्षा की अलख जगाने वाले स्व. मोहन सिंह को जयंती पर किया नमन
  • मधुबन ढाला के पास अनियंत्रित होकर बाइक गड्ढे में पलटी, युवक घायल
  • तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर टूटा, आधे घंटे तक मची रही अफरा-तफरी
  • Civic Nonsense: स्पीकर फ़ोन के इस्तेमाल पर दक्षिण रेलवे की अच्छी पहल
  • एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
  • हत्या की कोशिश के वॉन्टेड आरोपी को रसड़ा पुलिस ने किया गिरफ्तार, महिला पर किया था हमला
  • महानवमी पर पूजा-अर्चना और कन्या पूजन, मंदिरों में उमड़ी भीड़
  • प्लॉट पर बाउंड्री निर्माण को लेकर विवाद, सभासद समेत सात लोगों पर केस
  • जुआ खेलते पकड़े गए 9 लोग, पुलिस ने दो लाख से अधिक की नकदी बरामद की
  • क्षेत्र पंचायत कार्यालय के पास प्रेरणा कैंटीन की शुरुआत, महिलाओं के हाथ में संचालन, होंगी आत्मनिर्भर
  • नवरात्रि और विजयदशमी पर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने दीं शुभकामनाएं, कहा बनाए रखें आपसी सौहार्द
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर महिलाएं कैसे रहें सुरक्षित? मिशन शक्ति अभियान 6.0 के तहत किया गया जागरूक
  • मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, 12 नवंबर से शुरू होंगे दावे-आपत्तियां
  • दुर्गा मंदिर के स्थापना दिवस पर 151 महिलाओं का सम्मान
  • सरयू के कटान से प्रभावित गांवों के लोग बांसडीह तहसील का करेंगे घेराव, कई बैठकों के बाद आंदोलन का ऐलान
  • देवरिया-बलिया सीमा पर पुल से किशोर ने सरयू नदी में लगाई छलांग, परिजनों की डांट से नाराज था
  • संपूर्ण समाधान दिवस में नौ महिलाओं की शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण
  • दादा के नाम पर पौत्र ने गांव के सरकारी स्कूल में दी स्मार्ट क्लास रूम की सुविधा
  • डीएम बलिया का सख्त निर्देश, सुबह 10 बजे हर हाल में कार्यालय पहुंचें अधिकारी
  • बांसडीह क्षेत्र के गांव के पोखरे में मगरमच्छ देखे जाने की खबर से सनसनी, निगरानी बढ़ाई गई
  • बलिया की बेटी का चयन उत्तर प्रदेश अंडर 19 कबड्डी टीम में, नेशनल चैंपियनशिप खेलेगी
  • सिकंदरपुर में पकड़ा गया 22 लाख का गांजा, गाजीपुर की पुलिस टीम ने की कार्रवाई
  • बांसडीह क्षेत्र में युवक पर बाइक सवार हमलावरों ने चाकू और डंडे से किया हमला
  • घर से लापता पांच वर्षीय बच्ची का शव कुएं में मिला, पुलिस जांच में जुटी

You may have missed

Bansdih SDM Pushkar Mishra
  • जिला जवार
  • बांसडीह

शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए चार केंद्रों पर होगा मतदान, 5357 मतदाता देंगे वोट

General Desk 21 October, 2026
Late Mohan Singh Memory
  • जिला जवार
  • बांसडीह

पांच दशक पहले शिक्षा की अलख जगाने वाले स्व. मोहन सिंह को जयंती पर किया नमन

General Desk 21 October, 2026
Madhuban Dhala Accident
  • Accident
  • जिला जवार
  • बेल्थरा रोड

मधुबन ढाला के पास अनियंत्रित होकर बाइक गड्ढे में पलटी, युवक घायल

General Desk 21 October, 2026
Sonadih Accident crosing
  • Accident
  • CRIME डायरी
  • जिला जवार
  • बेल्थरा रोड

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर टूटा, आधे घंटे तक मची रही अफरा-तफरी

General Desk 21 October, 2026

Recent Comments

  • Shree Ram on योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रभात फेरी का आयोजन
  • Ramakant on मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का लाभ उठायें लाभार्थी
  • शिवकुमार सिंह कौशिकेय on छठ महापर्व पर विशेष- अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती देंगे अर्घ्य
  • Bablu on निर्माणाधीन कार्य समय से पूरा नहीं होने पर प्रोजेक्ट मैनेजर होंगे उत्तरदायी – डीएम
  • Kazipur Social Media on साड़ी से लटका मिला महिला का शव, परिजनों के मुताबिक विवाहिता ने खुदकुशी की

Tags

बलिया न्यूज बलियान्यूज़ बलियाबड़ीखबर बलिया लाइव बलिया समाचार बसपा बांसडीह बागीबलिया बागी बलिया बाढ़ बिजली बिल्थरारोड बिहार बीएसए बेल्थरारोड बैरिया ब्रेकिंग न्यूज भाजपा मंत्री मऊ मनियर मारपीट मुख्यमंत्री मौत रसड़ा रेल रेवती लखनऊ वाराणसी विधानसभा विधायक शराब सपा समाजवादी पार्टी सहतवार सांसद सिकंदरपुर सीएचसी सीयर सुखपुरा सोनबरसा हत्या हल्दी हादसा हिंदी न्यूज़
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Youtube
  • Facebook
  • Whatsapp
  • X
  • Instagram
  • Linked In
  • Telegram
  • Threads
© 2012 - 2026 Ballia LiVE | All rights reserved.