अखिल भारतीय भोजपुरी विकास सेवा संस्थान से संबद्ध गड़हा विकास मंच द्वारा आयोजित होने वाले स्व. हरिशंकर गड़हा महोत्सव में भोजपुरी गायकों ने अपना जलवा बिखेरना शुरू कर दिया.
अखिल भारतीय भोजपुरी विकास सेवा संस्थान से संबद्ध गड़हा विकास मंच द्वारा आयोजित होने वाले स्व. हरिशंकर गड़हा महोत्सव में भोजपुरी गायकों ने अपना जलवा बिखेरना शुरू कर दिया.
बलिया. बिदेशिया को देख कभी हंसते, कभी रोते रहे लोग. वैदिक प्रभात फाउंडेशन के कल्पवास शिविर महाबीर घाट गंगा तट पर रात्रि में भिखारी ठाकुर के नाटक बिदेशिया का मंचन जागरुक संस्थान बलिया के …
कोलकाता के लिटिल थेस्पियन ग्रुप द्वारा एसएम अजहर के निर्देशन में ‘पतझड़’ नाटक का मंचन हुआ.उमा झुनझुनवाला का शानदार अभिनय देख बलिया के कला प्रेमी चकित रहे.
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संकल्प साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया द्वारा अपने 15वीं वर्षगांठ पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह “संकल्प रंगोत्सव” का आयोजन किया गया है.
तोहरे कारनवाँ परानवाँ दुखित बाटे,
दया क के दरसन दे दऽ हो बलमुआँ।
काइ कइलीं चूकवा कि छोड़लऽ मुलुकवा तूँ,
कहलऽ ना दिलवा के हलिया बलमुआँ।
साँवली सुरतिया सालत बाटे छतिया में,
एको नाही पतिया भेजवलऽ बलमुआँ।
कवना नगरिया डगरिया में पिया मोर,
करत होइबऽ घर-बास हो बलमुआँ।
भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जीवन को जीवंत करने के प्रयास में बरसों से लगी सुप्रसिद्ध गायिका कल्पना 24 दिसंबर को पटना के विद्यापति भवन में एक समारोह के दौरान ‘द लेगेसी ऑफ भिखारी ठाकुर वोल्यूम-2’ को रिलीज़ करेंगी.
महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती और जनवादी शायर अदम गोंडवी की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है
युवा लोकगीत गायक शैलेंद्र मिश्र को मिला भिखारी ठाकुर ‘समाजी’ सम्मान
लोक साहित्य व संस्कृति के पुरोधा, भोजपुरी के शेक्सपियर का गांव कुतुबपुर काश. स्थानीय सांसद व केन्द्रीय राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी के सांसद ग्राम योजना के तहत गोद में होता तो शायद पुरोधा के गांव को तारणहार की प्रतीक्षा नहीं होती. गंगा नदी नाव से उस पर छपरा से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित कुतुबपुर गांव आज भी अंधेरे में है. कार्यक्रमों की रोशनी व राजनेताओं का आश्वासन भी उस गांव को रोशन नहीं कर सका.
रविवार को लोक संस्कृति के वाहक कवि व भोजपुरी के शेक्सपियर माने जाने जाने वाले भिखारी ठाकुर का जयंती मनाई गई, लेकिन क्या कोई यकीन कर सकता है कि भक्तिकालीन कवियों व रीति कालीन कवियों के संधि स्थल पर कैथी लिपि में कलम चलाकर फिर रामलीला, कृष्णलीला, विदेशिया, बेटी-बेचवा, गबरघिचोरहा, गीति नाट्य को अभिनीत करने वाले लोक कवि भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर का परिवार चीथड़ों में जी रहा हो.
असीमीत जमीनी जानकारी, सपाट शैली व अलौकिक इल्म ने तब के ‘लोकगायक’ भिखारी ठाकुर को अंतर्राष्ट्रीय उंचाई दी. अति सामान्य इस व्यक्ति की लोक समझ, शोध प्रबंधों का साधन बन गई. भोजपुरी के प्रतीक भिखारी ठाकुर अपनी प्रासंगिक रचनाधर्मिता के कारण भारतीय लोक साहित्य में ही नहीं, सात समुंदर पार मारीशस, फीजी, सूरीनाम जैसे देशों में भी अत्यंत लोकप्रिय हैं.