उन्होंने महोत्सव से जुड़े अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जिनको जो जिम्मेदारी मिली है, उसका समय से निर्वहन करेंगे. महोत्सव की भव्यता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने महोत्सव से जुड़े अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जिनको जो जिम्मेदारी मिली है, उसका समय से निर्वहन करेंगे. महोत्सव की भव्यता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए.
जिलाधिकारी ने विधायिका केतकी सिंह के घर जाने वाले रास्ते को सेनीटाइज किया, क्योंकि मुख्यमंत्री आने के बाद सीधे उनके घर जाएंगे, उसके बाद उनका भाषण होगा.
महिलाएं बुधवार को करवाचौथ की रस्में निभाएंगी. ऐसे में दशहरा उत्सव के समापन के बाद जिले में सुहागिन महिलाओं ने बुधवार को जमकर खरीदारी की.
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी , पं.परशुराम चतुर्वेदी , डा.भगवत शरण उपाध्याय , हरिप्रसाद वर्मा, श्रीहरि’ ,जगदीश ओझा ‘सुन्दर’ , अमरकान्त , डाॅ. केदारनाथ सिंह जैसे सैकड़ों साहित्यकारों की जन्मभूमि.
घटना की जानकारी होने पर पुलिस अधीक्षक एस. आनन्द ने घटना स्थल का दौरा किया था और तत्काल घटना का खुलासा करने के निर्देश दिए थे.
अयोध्या के सैन्य बल के साथ जिसदिन सायंकाल शत्रुघ्न जी वाल्मीकि आश्रम पहुँचते हैं, उसी रात्रि में सीता जी कुश – लव अपने जुड़वा पुत्रों को जन्म देती हैं.
बेटा पॉलिटेक्निक कर नौकरी की तलाश में है. उसे भी इस कार्य में लगाया है. क्योंकि नौकरी की अपेक्षा इसमें आय भी अधिक है. लिहाजा बच्चों की रुचि भी अब बढ़ने लगी है.
दामोदरपुर गांव में दशहरा के शुभ अवसर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो गंगा जमुनी तहजीब की मिशाल पेश करता है.
रसड़ा एक प्रमुख स्थान है. यहा नाथ संप्रदाय का प्रभाव है, जिसके कारण यहां नाथ बाबा का मंदिर बना हुआ है जहां नवरात्रि में मेला लगता है.
इस अवसर पर ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ के जिला प्रभारी पंकज कुमार मिश्र ने माता के पट का अनावरण करते हुए उपस्थित भक्त जनों को नवरात्र की बधाई दी
रसड़ा के शिवनगर उत्तर पट्टी में 15 वर्षों से बनाई जा रही है. मां की प्रतिमा पूरे जिले के लिए ऐसे ही खास नहीं होती. दरअसल इस मूर्ति को बनाने के लिए कारीगर अपनी पूरी कला का प्रदर्शन करते हैं. तब जाकर कहीं न कहीं यहां की मूर्ति पूरे जिले के लिए खास होती है.
बांसडीह, बलिया. शारदीय नवरात्रि का समय चल रहा है. अष्टमी नवमी को मेला भी लगेगा. वैसे दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध माना जाता है लेकिन देवरार गांव स्थित दुर्गा मंदिर पर शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनिवार को अलग नजारा दिखाई दिया जहां एकत्रित होकर महिलाएं, दो पुरुष एक साथ भोजपुरी में देवी गीत सुना रहे थे. ऐसे में दो देवी भक्त महिलाएं नाचने पर मजबूर हो गई.
उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ ने प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कलेक्ट्रेट को बंद कर दिया. जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एकत्रित होकर कर्मचारियों व शिक्षकों ने मुंह पर सफेद पट्टी बांध ली.
भगवती की बात को सुनकर राक्षस राजी हो गया और शाम होते ही नाला खोदना शुरू कर दिया. अभी वह सोनाडीह से कुछ दूरी पहले तक ही नाला खोद पाया था कि सूर्योदय हो गया.
दोनों मंदिर भक्तों की अभीष्ट सिद्ध कर रहे हैं. मान्यता है कि यहां की प्रतिमा सुबह से शाम तक तीन बार अपना रूप बदलती है.
श्रीभगवान राय कहते हैं कि मां जल्पा के दर्शन के लिए जिले ही नहीं आसपास के जिलों के लोग आते हैं. मन्नतें पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने का रिवाज है.
महिला मोर्चा की पूर्व जिला महामंत्री रागिनी सिंह ने सभी नारी शक्तियों को एक स्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुनः उनके नेतृत्व में देश को विश्व गुरु बनाने के लिए भाजपा को हर बूथ पर मजबूत बनाने के लिए आवाह्न किया.
मां की उचेडा में अवतरित होने की कहानी
कालान्तर में लगभग 150 वर्ष पूर्व मंदिर के समीपस्थ गोपालपुर गांव के एक ब्राम्हण विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने के लिये पैदल ही जाया करते थे.
पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 लखनऊ द्वारा चलाये जा रहे अभियान OPERATION CONVICTION के तहत पुलिस अधीक्षक एस0 आनन्द के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल व अभियोजन शाखा के एपीओ संजय गौतम के प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप कोर्ट ने सजा सुनाई.
शास्त्रीय आधार व मंदिर पुजारी ब्रजेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार इस मंदिर में देवी प्रतिमा की स्थापना मार्कण्डेय पुराण के अनुसार राजा सुरथ द्वारा की गई है जो चैत्र वंश में उत्पन्न हुए थे. उनका समस्त भूमंडल पर अधिकार था.