दोनों मंदिर भक्तों की अभीष्ट सिद्ध कर रहे हैं. मान्यता है कि यहां की प्रतिमा सुबह से शाम तक तीन बार अपना रूप बदलती है.
दोनों मंदिर भक्तों की अभीष्ट सिद्ध कर रहे हैं. मान्यता है कि यहां की प्रतिमा सुबह से शाम तक तीन बार अपना रूप बदलती है.
शास्त्रीय आधार व मंदिर पुजारी ब्रजेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार इस मंदिर में देवी प्रतिमा की स्थापना मार्कण्डेय पुराण के अनुसार राजा सुरथ द्वारा की गई है जो चैत्र वंश में उत्पन्न हुए थे. उनका समस्त भूमंडल पर अधिकार था.