प्रतियोगिता के इस युग में व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास करने वाली शिक्षा की आवश्यकता पर हो युवाओं का जोर

किसी भी कार्य की सार्थकता जब सिद्ध हो जाती है तो वही कार्य समाज के लिए मार्गदर्शन का कार्य करने लगता है