आचार्य ने कहा कि कलशयात्रा अपने आप में यज्ञ है. उन्होंने कहा कि मनुष्य के किसी पुण्य का उदय होता है तो कलशयात्रा या यज्ञ में भाग लेने का अवसर मिलता है.
आचार्य शास्त्री ने कहा कि अच्छे संस्कार कथा से ही लोगों को प्राप्त हो सकते हैं. इसलिए कथा सुनने के लिए माता पिता अपने बच्चों को भी अवश्य साथ लेकर जाएं.
ब्यासी गांव स्थित अखार के दत्तुमठ में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वामन भगवान के जन्म महोत्सव की कथा प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य गौरव कृष्ण शास्त्री ने सुनायी.
बलिया में पहली बार राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन होने जा रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के रंगकर्मियों का महासंगम इन 3 दिनों में होगा और 6 नाटकों का भव्य मंचन भी.
पितृपक्ष के दौरान अष्टमी तिथि को जीवित पुत्रिका व्रत किया जाता है, जो 22 सितंबर को है. संतान के दीर्घायु के जिउतिया सप्तमी को नहाय-खाय से शुरू होता है.
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ,माउंट आबू में तीन दिवसीय मीडिया कॉन्फेंस शुरू हुआ.दीदी मुन्नी ने कहा कि सबको सम्मान और स्वमान मुख्य धारणा है.
इस फिल्म में मूल रूप से बिहार क्रिकेट संघ के बंटवारे और उसी रणजी टीम की मान्यता रद्द करने की कहानी को दिखाया गया है. इसके जरिये देश के क्रिकेट जगत में होने वाली राजनीति को भी दिखाया गया है.
यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है. कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इस व्रत को “गौरी हब्बा” के नाम से जाना जाता है.
यहाँ कभी चर्चा के द्वारा आपको भिखारी ठाकुर जीवंत लगेंगे तो कभी पहली भोजपुरी फ़िल्म ‘गंगा मइया तोहके पियरी चढ़ाइबो’ की सुगंध अनुभव होगा. कभी छठ, कहँरवा, जँतसार सुनाई देगा तो कभी कबीर-रैदास भी सुनाई देंगे.
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