इस हवनात्मक रुद्र महायज्ञ में तिल से 219978 आहुतियां दी जाएंगी. यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु महिला-पुरुष उमड़ रहे हैं.
इस हवनात्मक रुद्र महायज्ञ में तिल से 219978 आहुतियां दी जाएंगी. यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु महिला-पुरुष उमड़ रहे हैं.
रंग बिरंगे परिधानों में स्त्री-पुरूष और बच्चे अपने हाथों में कलश लिए यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे. सबसे आगे संत महात्मा और आचार्यगण चल रहे थे.
यह महायज्ञ अयोध्या से आये श्री श्री 108 श्री परमात्मा दास जी महाराज एवं यज्ञधीश श्री श्री 108 श्री शिवेश्वर दास जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न होगा.
इस धार्मिक अनुष्ठान में गांव की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया. इस अवसर पर अनेक लोग मौजूद रहे. वही डीजे की भक्ति धुन पर बच्चे एवं ग्रामवासी थिरकते रहे.
मंदिर से प्रारंभ इस कलश यात्रा में क्षेत्र के कई गांवों के श्रद्धालुओं से पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो गया.
प्रवचन में क्षेत्र के सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने हिस्सा लिया. इस दौरान संत रविदास के जीवन वृतांत की विस्तृत रूप से चर्चा की गई.
वक्ताओं ने कहा कि सत गुरु रविदास जी भारत के उन चुनिंदा महापुरुषों में से एक हैं जिन्होंने अपने रूहानी वचनों से सारे संसार को एकता भाईचारा का संदेश दिया.
सुबह से ही यज्ञकर्ता आचार्यों द्वारा पढ़े जाने वाले मंत्रों की गूंज से वातावरण में भक्तिमय माहौल बना हुआ है. दोपहर से प्रवचन की गूंज इलाके में गूंज रही है.
भगवान कहते हैं कि मैं बैकुण्ठ छोड़ सकता हूं, तपस्वी के हृदय को छोड़ सकता हूं पर जहां मेरा भजन कीर्तन हो उस स्थान को नहीं छोड़ता.
संत श्रीधर चौबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में संचालन समिति गठित की गयी. इस समिति के तहत आगामी 24 फरवरी से 1 मार्च कथा ज्ञान यज्ञ आयोजित किया जायेगा.
कामदेव ने जब भगवान शिव की समाधि तोड़ दी तो भगवान शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को जला कर भस्म कर दिया. इस घटना का तीव्र आघात कामदेव की पत्नी रति को लगा.
प्रवचनकर्ता ने कहा कि राजा दशरथ की भी मृत्यु अपने पुत्र भगवान राम के वियोग में तड़प- तड़प कर ही हुई. भगवान अपने पिता को कर्म फल से छुड़ाने में असमर्थ रहे.
अपरान्ह से रात तक अयोध्या से पधारे प्रवचन कर्ता देवेंद्र जी महाराज तथा मानस कोकिला गौरंगी गौरा के प्रवचन से पूरा इलाका भक्ति रस में सराबोर हो रहा है.
राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ करने के बाद जब तीनों रानियों के बीच खीर का वितरण होने लगा तो एक गिद्ध ने कैकेई के हिस्से के खीर से कुछ अंश झपट लिया और उड़ गई.
इस यात्रा में कई गांवों के लोग हाथ में कलश लेकर ‘हर हर महादेव’, ‘हर हर गंगे’ जैसे भगवान के जयकारे लगाते गंगा तट के लिए रवाना हुए.
श्री खप्पड़िया एक ऐसे महान संत थे जिन्होंने विश्व कल्याण बहुत कठोर तपस्या की. उनका गाया भगवन्नाम संकीर्तन का मंत्र आज भी सबसे बड़ी साधना है.
शोभायात्रा में यज्ञाचार्य मातलेश्वर पांडेय के साथ पवन तिवारी और वाराणसी से आये कई आचार्य शामिल थे. श्री मद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ 18 जनवरी को संपन्न होगा.
अद्वैत शिव शक्ति परमधाम (डूंहा) के संस्थापक स्वामी ईश्वरदास ब्रम्हचारी (मौनी बाबा) के प्रतिनिधि के रूप में आधा दर्जन साधु संतों ने उर्स में शिरकत की.
अगर राम कथा सुनने की फुर्सत न मिले तो केवल राम नाम के जाप से जीव को मुक्ति मिल जाती है. उन्होंने कहा कि बिना राम के जीव का कल्याण सम्भव नहीं.
जिलाधिकारी कहा कि गंगा नदी के किनारे बसी 41 ग्राम पंचायतों में कमेटी के माध्यम से घाट, तालाब और हरियाली की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी.