अध्यात्म से विमुख हो रहे लोगों को प्रेरित करेगी “कैलाश दर्शन”

सुखपुरा: शिव ही सत्य है, सत्य ही सुंदर है, सुंदर ही प्राण वायु वाणी है, शेष मृत्यु है. शिव ऊंच-नीच, ज्ञानी-अज्ञानी, स्त्री-पुरुष, अमीर-गरीब में भेद नहीं करते. वह सच्चरित्र और कर्मयोगी हैं. ये बातें स्वामी परमेश्वरानंद सरस्वती उड़िया बाबा ने कही. वह संत यतीनाथ मंदिर परिसर में कैलाशी बेचूराम जनऊपुरी लिखित पुस्तक “कैलाश दर्शन” का विमोचन करने के बाद मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि “कैलाश दर्शन” आध्यात्म से विमुख हो रहे लोगों को प्रेरित करेगी कि भगवत नाम का स्मरण करें. स्वामी जी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा अत्यंत कठिन यात्रा है और बेचूराम ने कैलाश मानसरोवर का सहज दर्शन किया. दर्शन करते समय जो उन्होंने देखा-सुना उनका पुस्तक में वर्णन किया है. कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वालों के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी होगी.

इसके पूर्व स्वामी परमेश्वरानंद सरस्वती और सुरेंद्र गिरी जी महाराज को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया. संत यतीनाथ लोक सांस्कृतिक संस्थान सुखपुरा के बैनर तले आयोजित इस समारोह को आदित्य कुमार अंशु, गोपाल जी चितेरा, सौरभ कुमार ने भी संबोधित किया.

इस मौके पर बृज मोहन प्रसाद अनारी, बरमेश्वर नाथ पांडेय, नवचंद्र तिवारी, रमाशंकर वर्मा, शमशेर राय, ललन जी गुप्ता, राजेन्द्र वर्मा, विजय बहादुर सिंह, सुमेर गुप्ता, रविंद्र नाथ वर्मा, सुभाष जी आदि मौजूद रहे. अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य विजय शंकर सिंह और संचालन राजेंद्र सिंह गंवार ने किया.

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