उन्होंने यमुना किनारे असंख्य गोपियों संग रासलीला और उसमें पहुंचने के लिए भगवान शंकर के जाने से रोकने और तब भगवान शंकर द्वारा वेश बदलने की कथा भी रोचक तरीके से सुनाया.
उन्होंने यमुना किनारे असंख्य गोपियों संग रासलीला और उसमें पहुंचने के लिए भगवान शंकर के जाने से रोकने और तब भगवान शंकर द्वारा वेश बदलने की कथा भी रोचक तरीके से सुनाया.
दुबहर क्षेत्र के घोड़हरा स्थित महंथ जी के मठिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिन शुक्रवार को आचार्य पंडित सिद्धनाथ जी ने कथा में समुद्र मंथन और अजामिल की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन, श्रद्धा या जाने अनजाने में भी भगवान को याद करता है.
घोड़हरा गांव स्थित महंथ जी के मठिया में श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के निमित्त सोमवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई.
कथा के छठवें दिन सोमवार को व्यास पीठ से बताया गया की सुखदेव महाराज द्वारा परीक्षित को भागवत कथा का श्रवण कराया गया था. छठवें दिन के कथा में व्यास जी द्वारा कृष्ण भगवान द्वारा किए गए उद्धारों की चर्चा किया.
जगतगुरु रामानुजाचार्य पदवी से विभूषित किए गए जयकांताचार्य डॉ.जय गणेश मंगल पांडेय के गांव में चहुंओर खुशी
दुबहर, बलिया. भारत के मनीषी संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के कृपापात्र शिष्य कोसलेश सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर स्वामीजी महाराज ने त्रिदंडी देवधाम नगवा पर एक सप्ताह तक चले श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर क्षेत्र के नगवा निवासी डॉ जय गणेश चौबे को श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य की पदवी से विभूषित किया.
दुबहर, बलिया. गुरु के द्वारा दिया गया उपदेश ही कथा का सार होता है. कथा के सार यानी उत्कृष्ट बचन को प्रवचन कहते हैं. जहां एक बार आ जाए वहां समझिए कथा की शुरुआत …
श्री धाम वृंदावन से आये भगवताचार्य राम कुमार शास्त्री जी की अगुवाई में नर नारी देवी देवताओं का जयकारा लगाते हुए पतित पावनी गंगा तट सती घाट बहुआरा पहुंचे.
जनेश्वर मिश्रा सेतु के पास त्रिदंडी स्वामी घाट पर 5 से 12 नवंबर तक जारी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन विधिवत हवन पूजन के साथ हो गया.
कथा के दौरान पंडित चौबे ने राम जन्मभूमि पर दिए गए फैसले का भी स्वागत किया. उन्होंने कहा कि भारत की न्याय प्रणाली से किसी भी धर्म के लोग आहत नहीं हो सकते.
नगवा गांव के सामने त्रिदंडी स्वामी गंगा घाट पर श्रीमद् भागवत कथा के दौरान तुलसी शालिग्राम विवाह का आयोजन किया गया. श्रद्धालुओं ने इसकी मनोहर झांकी देखी.