महत्वपूर्ण रचनाओं का पाठ कर याद किए गए केदारनाथ सिंह

 मूर्धन्य हिंदी साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी का जाना सिर्फ हिन्दी साहित्य की नहीं, बल्कि दुनिया की सैकड़ों भाषाओं पर वज्रपात गिरने जैसा है. अपने समय के श्रेष्ठ कवि केदार नाथ सिंह के निधन से पूरा साहित्य जगत सकते में है

अपने संहतिया से चुहलबाजी में केदारनाथ सिंह लकठो-पटउरा मांगना कभी नहीं भूले

डॉक्टर साहब जब भी गांव आते अपने मित्र रमाशंकर तिवारी के साथ पैदल 4 किमी दूर पैदल चल कर रानीगंज बाजार जरूर आते थे.

जिलाधिकारी ने सुनी हर एक फरियादियों की समस्या, शीघ्र निस्तारण का दिया भरोसा

सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी भवानी सिंह खगारौत निर्धारित समय से 10 मिनट पहले ही पहुंच गये.

फेसबुक के कोठार से – केदार जी स्मृतियों में गूंजते रहेंगे – अपनी कविताओं की तरह

केदारजी ने मेरे पिताजी की डायरी ‘जग दर्शन का मेला’ की भूमिका लिखी थी. किताब विश्व पुस्तक मेले में जारी हुई. तब केदारजी कोलकाता में अस्पताल में थे. दिल्ली आकर फिर एम्स.

केदारनाथ सिंह नहीं रहे, घड़ी भर को मानो हिंदी ने साँस रोक ली

हिंदी कविता में नए बिंबों के प्रयोग के लिए जाने जाने वाले वरिष्ठ शब्द शिल्पी केदरानाथ सिंह का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) में भर्ती थे.