भृगुआश्रम के भृगु मंदिर में अपने पिता महर्षि भृगु की समाधि के दाहिने तरफ आदमकद विग्रह में विश्वकर्मा जी विराजमान हैं. महर्षि भृगु के पुत्र शिल्पकारों के आराध्य भगवान विश्वकर्मा दैत्य गुरु शुक्राचार्य के सगे भाई और भगवान सूर्य के ससुर तथा वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर के मनु यमलोक के राजा यमराज एवं यमुना के नाना है.
शासन प्रशासन की मदद के आस पर टकटकी लगाए बैठी हैं कोतवाली क्षेत्र के चन्द्रवार दुगौली गांव के साईं परिवार की दो मासूम बच्चियां. ये बच्चियां दो जून की रोटी के लिए दर दर भटक रही हैं. दूसरों के रहमो करमो पर जीवन बिताना इनकी लाचारी है. इन मासूम बच्चियों के सर पर से लगभग चार साल पहले मां-बाप साया उठ गया था.
