Ballia-तालाब की खुदाई में मिला प्राचीन ढांचा, 60 फीट लंबी पक्की ईंटों की संरचना कुषाण कालीन होने का अनुमान

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रविशंकर पांडेय, बांसडीह, बलिया

बांसडीह,बलिया. बांसडीह तहसील क्षेत्र के बंकवा गांव में तालाब की खुदाई के दौरान एक प्राचीन पक्की ईंटों की संरचना मिलने से पूरे इलाके में कौतूहल का माहौल है। गांव से लेकर चट्टी-चौराहों तक इस खोज की चर्चा जोरों पर है।

स्थानीय इतिहास प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना अत्यंत प्राचीन है और इसकी प्राचीनता कुषाण काल तक पहुंच सकती है।

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जानकारी के अनुसार बंकवा गांव के नरला मौजा में स्थानीय निवासी देवानंद सिंह एवं राजकुमार सिंह (पुत्र स्व. भगवान सिंह) अपने खेत में तालाब की खुदाई करा रहे थे। खुदाई के दौरान तालाब के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर अचानक लगभग 60 फीट लंबी पक्की ईंटों की दीवारनुमा संरचना दिखाई देने लगी। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, संरचना का स्वरूप और स्पष्ट होता गया, जिससे लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।

संरचना मिलने की सूचना राजकुमार सिंह ने गांव के ही प्रणेश सिंह एवं जितेंद्र सिंह ‘झमन’ सहित अन्य लोगों को दी। इसके बाद क्षेत्र के प्राचीन इतिहास के जानकार डॉ. अमृत आनंद और मणिबहादुर सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया।

स्थल निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने प्रारंभिक तौर पर इसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज बताया। डॉ. अमृत आनंद ने बताया कि संरचना का स्वरूप स्तूपनुमा दिखाई देता है तथा इसमें प्रयुक्त ईंटों की माप भी कुषाणकालीन निर्माण शैली से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन और पुरातात्विक खुदाई के बाद ही इसकी वास्तविक ऐतिहासिकता प्रमाणित हो सकेगी, लेकिन प्रथम दृष्टया यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत हो रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार संरचना के निकट स्थित नरला का डीह लंबे समय से ऐतिहासिक महत्व का स्थल माना जाता रहा है। यहां और इसके आसपास के क्षेत्रों से समय-समय पर प्राचीन ईंटें, मिट्टी के पात्रों के अवशेष तथा अन्य पुरातात्विक सामग्री मिलती रही है। इसके बावजूद अब तक इस क्षेत्र का व्यवस्थित सर्वेक्षण या उत्खनन नहीं कराया गया।

प्राचीन संरचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और पुरातत्व विभाग से स्थल का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विशेषज्ञ अधिकारियों की निगरानी में व्यापक स्तर पर वैज्ञानिक खुदाई कराई जाए तो क्षेत्र के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उनका मानना है कि यह खोज बलिया की ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम देने वाली साबित हो सकती है।

बंकवा में मिली इस रहस्यमयी संरचना की चर्चा अब गांव की सीमाओं से निकलकर पूरे इलाके में फैल चुकी है। चाय की दुकानों, बाजारों और चट्टी-चौराहों पर लोग इसकी ऐतिहासिकता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। हर किसी की निगाह अब पुरातत्व विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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