Ballia-सुदामा मिलन और नरकासुर वध के प्रसंग पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, कथा संपन्न

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रविशंकर पांडेय,बांसडीह,बलिया

बांसडीह,बलिया. बांसडीह में कचहरी स्थित दशवत ब्रह्मस्थान पर श्रीकृष्ण बाल ज्योति सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का सातवें दिन भव्य और भावनात्मक समापन हुआ। अंतिम दिन वृन्दावन से पधारे भागवताचार्य विशाल भागवत जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का ऐसा रसपूर्ण वर्णन किया कि श्रद्धालु भक्ति में पूरी तरह डूब गए।

कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए बताया कि यह केवल एक लीला नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव के साथ भगवान के संबंध का प्रतीक है। नरकासुर वध का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अधर्म और अत्याचार का अंत कर धर्म की स्थापना करते हैं।

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कथा के दौरान श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का मार्मिक प्रसंग आया, जिसे सुनकर पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता और निष्कपट प्रेम का यह सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां भगवान स्वयं अपने भक्त के चरणों में झुक जाते हैं।

भागवताचार्य ने भागवत कथा के श्रवण के महत्व को बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ इस कथा को सुनता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कथा के बीच उन्होंने जीवन से जुड़े गहरे संदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन में कोई समस्या जन्म लेती है, उसी समय उसका समाधान भी जन्म लेता है। कभी-कभी वह समाधान तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि वह हमारे प्रयास और विश्वास का इंतजार करता है। भगवान श्रीकृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में धैर्य और सही सोच सबसे बड़ी शक्ति है, इसलिए कभी हार नहीं माननी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति अपने मन पर विजय पा लेता है, वह संसार की हर उपलब्धि हासिल कर सकता है। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, बल्कि उसका अपना आलस्य है। इसलिए निडर होकर कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि सफलता वहीं झुकती है जहां श्रद्धा और परिश्रम होता है।

कथा के दौरान “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंजता रहा। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और देर रात तक लोग कथा का रसपान करते रहे।

इधर, यज्ञ मंडप में भी श्रद्धालुओं ने परिक्रमा (फेरी) लगाकर भगवान से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य राकेश तिवारी, अजय तिवारी, अभिषेक पाठक, अभिषेक मिश्र (मिंटू), पंकज तिवारी, अनिल तिवारी अधियार, प्रदीप गुप्ता, नीरज गोंड, संतोष कुमार तिवारी, बलवंत पाण्डेय, गणेश गुप्ता, रविंद्र मिश्रा, जयप्रकाश पांडे, कृष्ण कुमार पाण्डेय, ललन प्रसाद गोंड, बुलबुल गुप्ता, ऋषिकेश पांडे, चंद्रबली वर्मा, अवधेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सात दिनों तक चले इस भव्य आयोजन ने पूरे बांसडीह को भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कथा के समापन के साथ ही श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

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