अब कब चेतेंगे! खूब मिटाया हमने-तुमने, पानी यूं नादानी में, नहीं बचा धरती पर पानी, बहा व्यर्थ बेईमानी में

जल और जीवन का चोली दामन का साथ है. हमें जीवित रहने के लिए जल तो चाहिए ही प्रकृति प्रदत्त इस जल को संचित करने की व्यवस्था भी हमें ही करनी पड़ेगी.

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जब कुत्ते का मुखौटा लगाये प्रदर्शन कारियों ने सीएमओ को भौंकते हुये घेरा

गाजीपुर। शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गाजीपुर जिला चिकित्सालय में कुत्तों का मुखौटा लगाकर अनोखा प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं के हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां थी. जिन पर जिला अस्पताल सहित पूरे जनपद मैं कुत्ता काटने के इंजेक्शन न होने की बात कहते हुए चिकित्सा के मौलिक अधिकार हनन का उल्लेख किया गया था.

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श्रद्धांजलि सभा कर याद किये गये कामरेड शिवजी सिंह एडवोकेट

सुखपुरा(बलिया)।समाज के निर्माण नारों से नहीं नीतियों से होता है. नीतियों पर चलकर ही हम समाज व राष्ट्र को सफल बना सकते हैं. कामरेड शिवजी सिंह एडवोकेट ने अपने पूरे जीवनकाल में गुणवत्ता युक्त राजनीति की. वह दलित शोषित एवं पीड़ितों के हक व हकूक के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे. उनके आचरण वह नीतियों को आत्मसात कर हमें समाज और राष्ट्र को आगे ले जाने का संकल्प लेना होगा और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

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एक पखवारे से लापता पुत्र को पाकर छलक पड़े आंसू

गाजीपुर जिले के रामगढ़ कथपुरवा से डेढ़ माह पूर्व लापता हुए लड़के का समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद लड़के को आखिकार रविवार को असली माँ- बाप मिल ही गये.

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बच्चों में बंटी मिठाई, निलय व रेखा ने दी जननायक को भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर जेपी ट्रस्‍ट के प्रांगण में स्थित चंद्रशेखर कक्ष में भी पुष्‍पांजलि देने के सांथ, ट्रस्‍ट के व्‍यवस्‍थापक अशोक कुमार सिंह की ओर से बच्‍चों में मिठाइयां वितरित की गई.

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भारत में तो भ्रष्ट, पांच फीसदी से भी कम लोग हैं – चंद्रशेखर

चंद्रशेखर जी आजादी की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर 14 अगस्त 1997 को रेडिफ डॉट कॉम पर लोगों के सांथ चैट के लिए उपलब्धं हुए थे और उनके ऐसे सवालों का खुलकर जबाब दिया, जो लोगों को आज भी मथते हैं. लवकुश सिंह प्रस्तुत कर हैं तब के समय के कुछ चनिंदा सवाल-जबाब के मुख्य अंश

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नहीं भूलती जेपी के घर चंद्रशेखर की वह आखिरी शाम

राजनीति के इस बिगड़े स्‍वरूप के बीच चंद्रशेखर ही एक ऐसे राजनेता थे, जिनके लिए कभी जन-जन रो पड़ा. जी हां बात 10 अक्‍टूबर 2006 की है, जब चंद्रशेखर आखिरी बार जयप्रकाशनगर आए थे.

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…. गोया मौत भी उसकी हिम्मत के आगे नतमस्तक हो गई

हिम्मते मर्द मददे खुदा… यानी जो किसी काम को करने के लिए हिम्मत करता है उसकी मदद निश्चित रूप से खुदा करते हैं. इस कहावत को चरितार्थ होते लोगों ने मठिया गांव में उस समय देखा जब 24 वर्षीय साहसी युवक ने अपनी जान की परवाह न कर आग व धूआं के बीच घिरे तीन लोगों को बाहर निकाल उन्हें नई जिंदगी दी.

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संगीन पे धर कर माथा, सो गए अमर बलिदानी

कभी ना अस्त होने वाले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किसी में बगावत करने की हिम्मत नहीं होती थी. दिन प्रतिदिन अंग्रेजों के अत्याचार बढ़ते जा रहे थे. बेवजह भारतीय सताए जाने लगे चारों ओर हाहाकार मचा था.

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दिन भर में तीन बार रूप बदलती हैं खरीद की मां दुर्गा

तहसील मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूरी पर खरीद गांव में स्थित दुर्गा मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मां के दरबार में हाजिरी देने वालों का पूरे वर्ष तांता लगा रहता है.

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