निराश्रितों की सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई धर्म नहीं : विद्यार्थी

विद्यार्थी ने कहा कि स्वर्गीय पांडेय जैसा जननेता विरले ही पैदा होते हैं. वे एक कुशल लोकसेवक थे. उन्होंने अपने जीवन में जरूरतमंदों की नि:स्वार्थ सेवा की हैं.

  • विकास पुरुष के रूप में याद किए जाते रहेंगे विक्रमादित्य पांडेय

दुबहड़ : निराश्रितों की सेवा और परहित से बढ़कर कोई धर्म नहीं है. इसके मद्देनजर सामाजिक चिंतक बब्बन विद्यार्थी ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय विक्रमादित्य पांडेय की स्मृति में नगवा अखार ढाले पर दर्जनों निराश्रित विधवा महिलाओं को गर्म ऊनी शाल वितरित किये.

इस अवसर पर विद्यार्थी ने कहा कि स्वर्गीय पांडेय जैसा जननेता विरले ही पैदा होते हैं. वे एक कुशल लोकसेवक थे. उन्होंने अपने जीवन काल में परिचित-अपरिचित सभी जरूरतमंदों की नि:स्वार्थ सेवा की हैं.

बब्बन के कहा कि आज स्व.पांडेय की प्रेरणा से उन्हें दबे-कुचले लोगों की सेवा करने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्वार्थ के कारण समर्थ लोग भी सेवा-परोपकार में कम रुचि ले रहे हैं.

पूर्व प्रधान चंद्रकुमार पाठक ने स्व पांडेय की स्मृति में हर वर्ष इस आयोजन के लिए विद्यार्थी के प्रयासों को सराहा.

इस मौके पर मंगल पांडेय विचार मंच के अध्यक्ष केके पाठक, गणेशजी सिंह, अन्नपूर्णानन्द तिवारी, भोला पाठक, पन्नालाल गुप्ता, उमाशंकर पाठक, मोहन चौबे, रामलाल यादव, कमलेश चौबे, नर्वदेश्वर मिश्रा, नितेश पाठक, डॉ सुरेशचंद्र प्रसाद, सूर्यप्रताप यादव, मोहन जी, श्रीभगवान साहनी, अख्तर अली, कृष्ण कुमार साहनी, श्यामजी यादव, संजय जायसवाल, जवाहर सेठ आदि उपस्थित रहे.

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