Central Desk November 23, 2019

प्रयागराज से आलोक श्रीवास्तव

सन 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होना था। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन था. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सपा अध्यक्ष और उस वक्त मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव और कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे राहुल गांधी ने एक साथ, एक ही गाड़ी की छत पर सवार होकर इलाहाबाद में रैली निकाली थी. मैंने उस रैली को कवर किया था.

मोबाइल से फोटो खींची थी. रैली औऱ दोनों युवा नेता को देखने के लिए काफी भीड़ थी। दोनों नेता सबका अभिवादन कर रहे थे, उनके चेहरे पर खुशी थी. उनके हावभाव को देखकर ऐसा लग रहा था कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की ही सरकार उत्तर प्रदेश में बनेगी. लेकिन परिणाम विपरीत निकला. सपा-कांग्रेस रेस से बाहर हो गए और भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई.

नेताओं की दोस्ती सफलता तक ही सीमित होती है. समय के साथ सपा और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया. अब आया 2019 का लोकसभा चुनाव . लखनऊ में 02 जून 1995 को हुए गेस्टहाउस हाउस कांड के बाद एक दूसरे को फूटी आंख भी न देखने वाले सपा और बसपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा.

बसपा सुप्रीमो मायावती तो शून्य से 10 सीट पर पहुंच गईं लेकिन सपा 5 सीट पर ही रह गई. बसपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी और सपा को 5 सीटें मिलीं थीं. जब सपा और बसपा ने हाथ मिलाया था तो राजनीतिक हल्कों में चर्चा थी कि दोनों के वोट भाजपा को हराने के लिए पर्याप्त हैं.लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट पाना है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने मेहनत की और 49 फीसदी वोट शेयर कर लिए . जब 50 फीसदी वोट एक ही दल को मिल जाए तो उसका जीतना तय है.

 

अखिलेश यादव और राहुल गांधी की फाइल फोटो

 

यही हुआ , अमित शाह की रणनीति काम आई और उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटों में से भाजपा को 62 ,उसके सहयोगी अपना दल को 2 , कांग्रेस को एक , बसपा को 10 और सपा को 5 सीटें मिलीं. रायबरेली से कांग्रेस की सोनिया गांधी ही जीत हासिल कर सकीं , अमेठी से राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा. यहां से भाजपा की स्मृति ईरानी जीतीं. हार के बाद वही हुआ बुआ-बबुआ यानी मायावती और अखिलेश का गठबंधन एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए टूट गया.

अब अखिलेश का अनुभव बोल रहा

इन दो घटनाओं से लगता है अखिलेश यादव ने बहुत कुछ सीखा है , तभी तो बृहस्पतिवार ( 21 नवंबर , 2019 ) को प्रयागराज आए सपा अध्यक्ष अखिलेश ने स्पष्टतौर पर कहा कि समाजवादी पार्टी 2022 का विधानसभा चुनाव अकेले और खुद के दम पर लड़ेगी. वह किसी भी दल से समझौता नहीं करेंगे.

उनका कांग्रेस और बसपा से मिलकर चुनाव लड़ने का अनुभव अच्छा नहीं रहा. चाचा शिवपाल यादव के पार्टी में शामिल होने या उनकी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से समझौते के बारे में पूछे गए सवालों पर पहले तो उन्होंने टालमटोल की लेकिन बाद में कहा कि इस बारे में वह फिलहाल कुछ नहीं बोलना चाहते और सही वक्त आने पर ही इस पर कोई जवाब देंगे.

हालांकि किसी भी पार्टी से समझौता नहीं करने का एलान कर उन्होंने चाचा शिवपाल के बयान का जवाब दे दिया.वह पूर्व विधायक विजमा यादव की बेटी की शादी में शिरकत करने यहां आए थे. यहां कुरुदने पर कहा कि समाजवादी पार्टी अभी से सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है. 2022 का परिणाम सपा के पक्ष में होगा.

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