21 अगस्त 1942 को बलिया में जनक्रांति निर्णायक दौर में पहुंची. हजारों क्रांतिकारियों ने सिकंदरपुर समेत कई स्थानों पर अंग्रेजी प्रशासन को चुनौती दी. थानों पर तिरंगा फहराया गया, सरकारी कागजात जलाए गए और स्वराज सरकार का संचालन शुरू हुआ. अंग्रेज नौकरशाही को अंततः आत्मसमर्पण करना पड़ा.

