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लगातार हो रही बारिश से सभी सड़कों पर जगह जगह पानी लग गया है. बैरिया ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत भीखा छपरा गांव के लोगों के घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया. इस वजह से बाजार से किराना सामान, आटा चक्की पर गेहूं पीसवाना, किसानों को खेत से मवेशी के लिए चारा जुटाना सहित अन्य कार्यो में काफी परेशानी हो रही है.
लालगंज-रेवती मार्ग अंतर्गत बैरिया चिरैया मोड़ के पास लोहे के खंभे में करंट उतरने से एक सांड घटना स्थल ही मौत हो गई. वहां खेल रहे कुछ बच्चे सांड को बिजली के खंभे के पास गिरा देख कर उसके तरफ दौड़े लेकिन वहां मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति स्थिति को भांप कर हो हल्ला कर यह कहते हुए रोका कि बिजली के खंभे में करंट उतर आया है. तुम लोग उसके पास ना जाओ.
बताते चलें कि शनिवार को अहले सुबह से गोपालपुर गांव में गंगा नदी के बाढ़ का पानी परमहंस कुम्हार के घर के पास से घुसने लगा है. गांव में अफरा-तफरी का माहौल है. गोपालपुर गांव के निचले हिस्से में पानी फैलने लगा है ऐसे में निचले हिस्से के दहारी राम भिखारी राम दशरथ राम मोहन राम तेजू राम नवमी राम आदि लोग अपने परिवार पशु और सामान के साथ दुबे छपरा एनएच 31 के किनारे सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं.
द्वाबा के बुजुर्गों में बिखरी पड़ी 18 अगस्त 1942 के जंगे आजादी के संघर्ष की कड़ियों को समेटने पर यह बात सामने आती है कि कभी बहुत पहले मंगल पांडे ने स्वाधीनता के सपनों का जो बीज बोया था व सन् 42 में जवान हो चुका था. महात्मा गांधी के “करो या मरो” आवाहन की जागृति द्वाबा में भी आई. उस कालखंड में देश के बड़े नेता जेल में बंद थे.
