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बताते चलें कि शनिवार को अहले सुबह से गोपालपुर गांव में गंगा नदी के बाढ़ का पानी परमहंस कुम्हार के घर के पास से घुसने लगा है. गांव में अफरा-तफरी का माहौल है. गोपालपुर गांव के निचले हिस्से में पानी फैलने लगा है ऐसे में निचले हिस्से के दहारी राम भिखारी राम दशरथ राम मोहन राम तेजू राम नवमी राम आदि लोग अपने परिवार पशु और सामान के साथ दुबे छपरा एनएच 31 के किनारे सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं.
द्वाबा के बुजुर्गों में बिखरी पड़ी 18 अगस्त 1942 के जंगे आजादी के संघर्ष की कड़ियों को समेटने पर यह बात सामने आती है कि कभी बहुत पहले मंगल पांडे ने स्वाधीनता के सपनों का जो बीज बोया था व सन् 42 में जवान हो चुका था. महात्मा गांधी के “करो या मरो” आवाहन की जागृति द्वाबा में भी आई. उस कालखंड में देश के बड़े नेता जेल में बंद थे.
कोरोना काल के कारण दो साल बाद क्षेत्र के हल्दी, मनियर, बेल्थरा रोड सिकंदरपुर सोनवानी, बिगही, कृपालपुर, कठही पुरास,रेपुरा,सीताकुण्ड, गायघाट,सहित दर्जनों गांवों में मुहर्रम का त्योहार धूमधाम से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के साथ मनाया गया. ताजियाा जुलूस भी निकाला गया. जिसमे ताजिया ,गाड़ी व लोगों के हाथ मे तिरंगा था.
भारतीय स्टेट बैंक के कोटवां (रानीगंज) शाखा में शनिवार दोपहर बाद लगभग ढ़ाई बजे बिजली के शार्ट सर्किट से लगी आग से पूरे बैंक में धुआं भर गया. लेनदेन कर रहे ग्राहक बैंक से बाहर भाग खड़े हुए.भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई.किंतु बैंक कर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बैंक में रखें अग्निशमन उपकरणों से आग पर काबू पाया.जिससे बड़ी अनहोनी टल गई. बावजूद इसके बैंक के सिस्टम को इस कदर नुकसान पहुंचा है कि इस बैंक में लेनदेन की स्थिति बनाने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है.
अधिवक्ताओं का कहना था कि तहसीलदार का स्थानांतरण हमारी समस्या का समाधान नहीं है. हमारी मांग तहसीलदार शैलेश चौधरी के निलंबन, हमारे द्वारा बैरिया एसएचओ को दिए गए तहरीर पर मुकदमा तथा उनकी विभागीय जांच यह तीन मांग थी. जब तक हमारी मांग पूरा नहीं हो जाती हमारा आंदोलन जारी रहेगा. हम अपना आंदोलन और तेज करेंगे.
दोकटी थाना क्षेत्र के कर्णछपरा निवासी व त्रिपुरा पुलिस में बतौर तैनात जवान अमरजीत सिंह उर्फ सुनील सिंह (30) पुत्र विजय सिंह का विगत एक माह से वाराणसी के एक हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. अभी दो रोज पहले वाराणसी से अपने परिजनों के साथ कर्ण छपरा अपने गांव आये थे. शनिवार की रात अपनी पत्नी से चेहरा देखने के लिये शीशा की डिमांड की. अपना चेहरा देखने के उपरांत अमरजीत ने पत्नी से लाइसेंसी पिस्टल को आलमारी से निकालने के लिये कहा. पत्नी से अमरजीत ने गर्म लहजे में डांट कर पिस्टल जबरिया मंगवाया और थोड़ी देर बाद ही कनपटी पर गोली मारकर जिंदगी को अलविदा कह गया.
