बलिया में गंगा, घाघरा, तमसा के तेवर में नरमी आई है, हालांकि गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. वाराणसी में उफनाई गंगा अब घाटों की सीढ़ियों से उतर चुकी है, बाढ़ का कहर थमने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोग बाग अपने घरों को संवारने में जुटे है. बाढ़ के पानी में हालांकि सैकड़ों कच्चे मकान जमीदोज हो चुके हैं, हजारों एकड़ कृषि योग्य जमीन पर खड़ी फसलें बाढ़ में बह गई हैं. खेतों में मेड़ें गुम हो चुकी है, कई इलाकों में मृत पशुओं के शव दुर्गंध फैला रहे हैं, जबकि गांव की पगडंडी दलदली होने के कारण उसमे चलना फिरना दूभर है.
मंगलवार को भोजन पैकेट से भरे वाहनों को खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार और एडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. दुबहर एवं बेलहरी शिक्षा क्षेत्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह के निर्देशन में भोजन पैकेट बनाने तथा बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है.
बिचलाघाट पुलिस चौकी के पास नलकूप को चालू करने, लोहापट्टी गुदरी बाजार में गंदा पानी एवं जापलिनगंज में बिछाई गयी पाईपलाईन की सफाई का मामला उठाया गया. ईओ नगरपालिका ने इस समस्या को दूर कराने का आश्वासन दिया. एक व्यापारी ने प्रतिबन्धित आक्सिटोसिन इन्जेक्शन का प्रयोग लौकी सहित अन्य सब्जियों में करने की बात कही. इसी तरह स्टेराईड दवा को प्राइवेट व सरकार डाक्टरों द्वारा लिखे जाने की शिकायत की गयी.
