


वाराणसी। भारत में गुरु -शिष्य परंपरा हजारों वर्ष पुरानी रही है तथा इसी परंपरा में चंद्रग्रहण मंगलवार, 16 जुलाई को मध्यरात्रि उपरांत लग रहा है. इस दिन आषाढ़ी पूर्णिमा होने के कारण गुरु पूर्णिमा का भी योग बन रहा है. यह लगातार दूसरा साल है, जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है. बीते साल भी 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन ही खग्रास चंद्र ग्रहण लगा था. सूतक को लेकर शंका-कुशंकाएं बनी हुई हैं कि- सूतक में गुरु -शिष्य परंपराओं का निर्वाह कैसे हो? पूजा कैसे हो ?
- ग्रहण का समय तकरीबन 3 घंटे का होगा, जो 1.32 बजे मध्यरात्रि से तड़के 4.30 बजे तक होगा
- इसका असर भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी होगा
- चंद्र ग्रहण पूरे भारत में देखा जा सकेगा. इसके अलावा यह ऑस्ट्रेलिया, एशिया (उत्तर-पूर्वी भाग को छोड़ कर), अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश भाग में दिखाई देगा.
- गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण होने से पूजा कार्यक्रम प्रभावित होंगे. दरअसल चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. ऐसे में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ रात में 01:31 बजे हो रह है तो सूतक काल 9 घंटे पूर्व यानी शाम को 04:30 बजे से ही लग जाएगा. चंद्र गहण के मोक्ष होने तक सूतक काल होता है. मान्यता है कि सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. गौरतलब है कि सूर्य ग्रहण में सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले ही लग जाता है.
- सावन के पहले दिन लग रहे ग्रहण के कारण खास कर शिव भक्तों के लिए बाबा के दर्शन का इंतजार बढ़ जाएगा.
- ज्योतिषियों के अनुसार खग्रास चंद्रग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन है. इस दिन मंगलवार है और उत्तर आषाढ़ नक्षत्र है.
- इस ग्रहण के चलते राजनीतिक उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदा और भारतीय राजनीति में उतार-चढ़ाव की संभावना है.
- जिस तरह चंद्रमा के प्रभाव से समुद्र में ज्वारभाटा आता है, उसी प्रकार चंद्रग्रहण की वजह से मानव समुदाय प्रभावित होता है.
