अपने बड़े भाई का खड़ाऊ अपने सिर पर शिरोधार्य कर अयोध्या की राजगद्दी के ऊपर रख सन्यासी के रूप में राज किया. रामायण हम सबको यही सिखाती है कि भाई को हमेशा भाई की विपत्ति में साथ देना चाहिए ना की उसकी संपत्ति का अधिग्रहण करने की कोशिश करना चाहिए.
राम को न देखकर राजा दशरथ हाय-राम, हाय-राम कहते हुए अपना प्राण त्याग देते हैं. इसके उपरांत गुरु वशिष्ट के निर्देशानुसार भरत, शत्रुघ्न ननिहाल से बुलाए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि आतिशबाजी भीड़ से हट के होनी चाहिए. उस दिन बिहार की तरफ से आने वाली और जाने वाली नावों का संचालन बंद रहेगा. सोशल मीडिया की भ्रामक खबर को पहले प्रशासन से सत्यापित कराना सुनिश्चित किया जाए.
नारद कन्या के हाथ को देखकर मोहित हो जाते हैं. नारद ने विष्णु से प्रार्थना कर सुंदर रूप की मांग करते हैं. इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें बंदर का रूप दे दिया. जब नारद को पता चला कि विष्णु ने बंदर का रूप दिया है तो वे क्रोधित होकर विष्णु को श्राप दे देते हैं.
भंडारे में सैकड़ो लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया.कार्यक्रम को सफल बनाने में विश्वनाथ पाठक, दीपक खरवार, अंजनी पाठक, राहुल पाठक, दीपक पासवान, हृदयानंद पाठक एडवोकेट, पिंटू पाठक, मोहनलाल, धीरेंद्र पाठक आदि का योगदान रहा.
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इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि जी के चरणों में पुष्प अर्पित करते हुए सपा के राष्ट्रीय सचिव रामगोविन्द चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा देश ऋषियों मुनियों का देश रहा हैं.
इस दौरान दर्शकों ने जमकर हल्ला मचाया. हंगामे से पूर्व रामलीला मंच पर रावण वध के बाद विभिषण का लंका में राज्याभिषेक और सीता वापसी की लीला का मंचन हो रहा था.
22 दुर्गा प्रतिमाओं तथा करीब 8 दर्जन से अधिक अन्य प्रतिमाओं के साथ करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे जुलूस में जहां बच्चे, बूढ़े, नौजवान ढ़ोल, नगाड़े तथा भांगड़े की धुनों पर थिरक रहे थे.