बतकही

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बतकही – कुछ और नहीं, बलिया लाइव का ब्लॉग है. यहां आप विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बातें सुन सकते हैं.

आखिर किसने छीन ली उनकी खुशी

तटवर्ती गांवों के लोगों की आंखों के सामने उनके आशियाने ध्वस्त होते रहे, खून-पसीने से उपजायी फसलें उनकी आंखों के सामने पानी में डूबती रहीं.

गांव मर रहे हैं…और मारे जा रहे हैं

दो बेटियां थी बिना जांचे-परखे जैसे-तैसे बियाह कर दिए…अब उ बेचारिन के का गलती जो ससुराल में नौकरानी बन के जी रही है, दो बेटों में एक कमाने सूरत भाग गया.

रामव्यास बाबा – तिकवत का बाड़…… आगे बढ़ मरदे….. बाबा एगो हइए हवन

कद काठी से हल्के फुल्के थे ही, मगर उनकी यह हरकत प्रेमचंद की ‘बूढ़ी काकी’ की याद दिला रही थी कि ‘बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरामन होता है.’

नदियां बदला ले ही लेंगी….

अब हमारी सुरक्षा की जिम्मेवारी केवल फोर्स पर है…. फोर्स ही हमें हर आपदा से बचा रही है… सीमा से लेकर गांव तक…. क्योंकि हमारी बाकी प्रतिरोधक मशीनरी… गवर्नेंस कुंद पड़ गई है…

पानी अब उतरने लगा है ….

दियारे पर दो-तीन दशक पहले घनी आबादी वाले गांव थे, जिनमें पचासों हजार की आबादी बसी हुई थी.अचानक गंगा ने अपना रास्ता बदला और ये गांव उसमें समाते चले गए.

गांगा जी बिलववले बाड़ी, उहे फेरू बसाइहें…

मुख्यमंत्री का आदेश था कि कोई भी बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे नहीं रहे… मगर तादाद इतनी ज्यादा है कि सभी को छत की ओट नसीब नहीं हुई….

जिस तरह चाहो बजाओ यार, हम आदमी नहीं, झुनझुने हैं!

दुबेछपरा रिंग बांध को बनाने में जितनी लागत आई थी, उससे डेढ़ या पौने दोगुना उसे बचाने की कवायद में जाया हो चुका है. खुद बैरिया विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह का दावा है 29-30 करोड़ रुपये उनकी सरकार ने बांध को बचाने पर खर्च किया, मगर लोगों को प्राकृतिक आपदा से बचाने में विफल रहे. ऐसे में कई सवाल किसी भी संवेदनशील आदमी के दिमाग में कौंध सकते हैं.

हिन्दी में हस्ताक्षर नहीं तो पुरस्कार वापस

सम्मानित होने के लिए लोग समारोह स्थल पर पहुंचे. अंग्रेजी में हस्ताक्षर देख आयोजक ने कहा कि हिन्दी में हस्ताक्षर न करने पर पुरस्कार वापस ले लिये जायेंगे.

अपराध इतिहास-भूगोल ही नहीं, बलिया के अर्थशास्त्र को भी डावांडोल कर रहा

दीप तले अंधेरे की कहावत चरितार्थ करता है इनका अपना घर, अपना इलाका. क्या वजह है कि यहां की प्रतिभाएं अन्यत्र रंग दिखाती हैं, जबकि यहां लाचार दिखती हैं? ये सवाल अब भी अनुत्तरित है.