रेलवे प्रशासन द्वारा यात्री जनता की सुविधा को देखते हुए ग्रीष्मकालीन साप्ताहिक विशेष गाड़ी का संचालन किया जाएगा जो श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा वाया गाजीपुर सिटी, बलिया, सुरेमनपुर तथा छपरा होते हुए गुवाहाटी तक जाएगी.
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने मंगलवार को जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों से चोरी हुए या गुमशुदा हुए 61 मोबाइल को बरामद कर उनके मोबाइल स्वामियों को सुपुर्द किया
शहर कोतवाली क्षेत्र के जापलिनगंज निवासी त्रिवेणी राय किसी काम से घर से निकले थे। काजीपुरा रेलवे क्रॉसिंग पार करते समय साबरमती एक्सप्रेस की चपेट में आने
एक ही स्थान पर पिछले आठ सालों से जमे लेखपालों का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है। डीएम बलिया प्रवीण कुमार लक्षकार ने राजस्व कार्यों में पारदर्शिता के लिए यह तबादले किए हैं।
Please LIKE and FOLLOW बलिया LIVE on FACEBOOK page https://www.facebook.com/BalliaLIVE आशीष दूबे/आतिश उपाध्याय,बलिया बलिया: प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बुधवार को कहा कि बलिया में डॉल्फिन व्यू पॉइंट जल्दी ही शुरू …
एंबुलेंस सेवा का मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा व प्रभारी सीएमओ आदि के साथ विधि-विधान से पूजन कर शुभारंभ किया। मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार से जनपद
खेजुरी थाना क्षेत्र के खेजुरी बाजार में बने एक मकान पर शुक्रवार को ईडी की टीम ने छापेमारी की। तीन गाड़ियों से पहुंची टीम को देखकर पहले तो लोग कुछ समझ नहीं पाए, लेकिन थोड़ी देर बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
रैंकिंग अपेक्षा के अनुरूप रूप न आने पर आने पर जिलाधिकारी ने हर सप्ताह स्वयं गहन समीक्षा करनी शुरू की। पोर्टल पर शिकायतों के समाधान के प्रति जो भी विभाग लापरवाह दिखे, उसे समय पूर्व चेतावनी दी गई।
जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार द्वारा 10 चौराहों को अत्याधुनिक बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया, जिस पर परिवहन विभाग द्वारा 3 करोड़ की धनराशि निर्गत की गई है
आम आदमी पार्टी बलिया इकाई ने उत्तर प्रदेश में शराब के ठेकों पर एक बोतल पर एक बोतल फ्री बंटने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल को संबोधित पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा है।
नगरा थाना क्षेत्र में पेड़ से लटके मिले 20 वर्षीय पूजा के शव ने पूरे जिले में सनसनी मचा दी थी। इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही थी, अब पुलिस ने इस मामले का खुलासा करने का दावा किया है।
जिला अस्पताल बलिया की इमरजेंसी में निरीक्षण व चेकिंग के बाद भी व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. आलम यह है कि जो बीमारी सरकारी अस्पताल की दवा या सौ-दो सौ रुपये की दवा में ठीक हो सकती है, उस पर भी अस्पताल के चिकित्सक पांच सौ से एक हजार रुपये तक खर्च करा रहे हैं.
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