रानीगंज में बड़ी दुर्गाजी का विसर्जन जुलूस नाचते गाते, जयकारा लगाते निकल चुका है. तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार रानीगंज, भीखाछपरा, भरतछपरा, कोटवा का ताजिया जुलूस निर्धारित समय से पहले निकला.
रानीगंज में बड़ी दुर्गाजी का विसर्जन जुलूस नाचते गाते, जयकारा लगाते निकल चुका है. तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार रानीगंज, भीखाछपरा, भरतछपरा, कोटवा का ताजिया जुलूस निर्धारित समय से पहले निकला.
शारदीय नवरात्र के सातवे दिन शनिवार को नगर व ग्रामीण क्षेत्रों मे स्थापित दुर्गापूजा पण्डालों मे मां दुर्गा के दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा.
जयप्रकाशनगर (बलिया)। स्थानीय ग्राम के दलजीत टोला में दशहरे की इस वर्ष विशेष तैयारी थी. बड़ा पंडाल, विशाल मेला सब कुछ पूरी तरह तैयार था, सुबह आठ बजे मां का पट खुला, लोग दर्शन …
दलजीत टोला में वर्ष 1975 से शुरू दुर्गा पूजा का यह 42 वां वर्ष है. सप्तमी के दिन जैसे ही मां का पट खुला क्षेत्र भर के श्रद्धालु दर्शन को उमड़ पड़े. इसी दिन 101 दीप भी देवी दरबार में प्रज्जवलित किए गए. शेर ए काली क्लब द्धारा आयोजित इस पूजनोत्सव में इस बार खास आकर्षण पंडाल रहा.
सोमवार को लगभग ग्यारह हजार की संख्या में अखंड दीपक जलाये गए. देश के कोने कोने से लोग आकर मां का दर्शन पूजन करते है, वर्ष भर मां के धाम में शादी, मुंडन, कीर्तन एवं रामायण का आयोजन होता रहता है. मां के दर्शन मात्र से ही मानव का कल्याण हो जाता है, रामनवमी के दिन मा के धाम पर विराट मेले का आयोजन किया जाता है
मां कष्टहरणी का दर्शन करने के पश्चात बक्सर जाते समय लक्ष्मण ने बाराचवर ब्लाक के उत्तर दिशा में रसड़ा के लखनेश्वरडीह नामक स्थान पर लखनेश्वर महादेव की स्थापना की थी, जो आज भी लखनेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है.
सनफ्लावर पब्लिक स्कूल के प्रांगण में दशहरा के शुभ अवसर पर छात्र छात्राओं ने महिषासुर वध एकांकी प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को भाव विभोर कर दिया.
त्रेतायुग में भगवान राम, लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से सिद्धाश्रम बक्सर जाते समय यहां पर रूक कर मां कष्टहरणी का दर्शन पूजन किए थे. उसके पश्चात कामेश्वर नाथ धाम कारो जो बलिया एवं गाजीपुर के सीमा पर स्थित है, वहां पहुंचने का प्रमाण है.
गाजीपुर जनपद में मुहम्मदाबाद-चितबड़ागांव मार्ग पर करीमुद्दीनपुर थाने के समीप मां कष्टहरणी देवी का धाम आस्था, श्रद्धा व विश्वास से सराबोर अपनी पहचान बनाये हुए है. सदैव अपनें भक्तों के कष्टों को हरने वाली देवी मां का नाम ही है मां कष्टहरणी. जिन्हें दया की सागर, ममतामयी, करूणामयी आदि रूपों की देवी भी कहा जाता है.
नवरात्र में शक्ति स्वरूपा मां भगवती के आराधना का तो महत्व है ही. इस दौरान कन्या पूजन का महत्व भी कम नहीं होता है. धर्म ग्रन्थों में कुमारी पूजा को नवरात्र का अनिवार्य अंग कहा गया है. यही नहीं, इस दरम्यान पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी का प्रतीक बताया गया है.
शारदीय नवरात्र के पहले दिन नगर सहित ग्रामीण अंचलों में देवी के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का रेला लगा रहा. वही घरों में कलश स्थापना कर मां देवी की पूजा अर्चना प्रारम्भ हो गया.
बैरिया थाना परिसर मे सोमवार को क्षेत्राधिकारी त्रयंबक नाथ दुबे की अध्यक्षता में मुहर्रम व दशहरा पर्व को शान्तिपूर्ण सम्पन्न कराये जाने के मद्देनजर शान्ति समिति की बैठक हुई.
दशहरा व मोहर्रम के मद्देनजर रविवार को शान्ति समिति की बैठक पुलिस चौकी सीयर के प्रांगण में आयोजित की गयी. बैठक में नगर निवासी खालिद जहीर ने जामा मस्जिद के समीप रास्ता खराब होने तथा नाले की पटिया टुटने, चन्दायर बल्लीपुर निवासी इकबाल ने रास्ते की समस्या, और पशुहारी निवासी मु़ अब्बासी ने बिजली के तार नीचे लटके होने आदि की समस्या उठाई.