मनुष्य एक विचारवान प्राणी है. यह एक ओर जहां अपनी सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सचेष्ट और प्रयत्न शील रहता है, वहीं दूसरी ओर अपनी मुक्ति के लिए भी आतुर और चिंतित रहता है. ऋषि-महर्षियों चिंतकों मनीषियों और धर्म धुरंधरों ने मानव की इसी चित्त-वृत्ति को देखते हुए लोकमंगल की भावना से समय समय और स्थान स्थान पर मुक्ति के साधन और स्थल को भी रेखांकित किया है.
उत्तर प्रदेश के विकास के लिए शासन के नवीन एजेण्ड़ा 80 कार्यक्रम, 50 लाख से अधिक धनराशि के अपूर्ण परियोजनाओं, जिला योजना, 20 सूत्री कार्यक्रम, सांसद आर्दश ग्राम योजना, मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा से सम्बन्धित कार्यक्रम एवं अन्य योजनाओं की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी गोविन्द राजू एनएस की अध्यक्षता में 04 नवम्बर को पूर्वान्ह 11 बजे विकास भवन सभाकक्ष में होगी.
