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रविशंकर पांडेय,बांसडीह,बलिया
सरयू में दो फीट बढ़ा जलस्तर, कटान ने पकड़ी रफ्तार
7.89 करोड़ की बचाव योजना शासन में अटकी
This Post is Sponsored By Memsaab & Zindagi LIVE
ग्रामीण बोले- पहले घर उजड़े, अब खेत भी खत्म हो रहे
बांसडीह,बलिया. मानसून की शुरूआत में ही सरयू नदी बांसडीह क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ा संकट बन गई है। नदी का बढ़ता जलस्तर और तेज बहाव भोजपुरवा, सुल्तानपुर में डैंपनर के आगे तेज कटान कर रहा है. नदी अब मानो भोजपुरवा गांव के अस्तित्व को ही निगल जाना चाहती है.
पिछले कुछ दिनों में सरयू का जलस्तर करीब दो फीट बढ़ने के बाद कटान ने भयावह रूप ले लिया है। नदी अब तक करीब 10 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है और हर दिन खेतों की मेढ़ें टूटकर सरयू में समा रही हैं। खेती ही जिन परिवारों की आजीविका का एकमात्र सहारा थी, उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
भोजपुरवा में नदी के किनारे खड़े किसान बेबसी के साथ अपनी जमीन को धारा में समाते देख रहे हैं। जिन खेतों में कुछ महीने पहले तक फसलें लहलहाती थीं, वहां आज सिर्फ तेज बहता पानी दिखाई दे रहा है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीण हर पल नई जमीन टूटने की आशंका में जी रहे हैं।

ग्रामीण मुन्ना यादव, शिवमुनि यादव, उमेश यादव, रीता देवी, ललिता देवी, फुलौटी देवी, गुड्डू यादव, परमेश्वरी देवी, वीरेंद्र यादव तथा सुखदेव यादव ने कहा कि “कटान के डर से पहले अपने आशियाने उजाड़ने पड़े, अब हमारी खेती भी खत्म होती जा रही है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में हमारे पास न रहने के लिए घर होगा और न खेती करने के लिए जमीन।”
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से बचाव कार्य की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है। इस बार नदी ने गांव की उपजाऊ जमीन पर सबसे बड़ा हमला बोला है, फिर भी स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो सका है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता देवेश कुमार ने बताया कि भोजपुरवा को कटान से बचाने के लिए विभाग ने 7.89 करोड़ रुपये की परियोजना का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था। योजना में जियो बैग, कटर तथा पॉर्क्युपाइन संरचनाएं लगाने का प्रस्ताव शामिल है, लेकिन अब तक शासन से इसकी स्वीकृति नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि पॉर्क्युपाइन तकनीक नदी के तेज बहाव को नियंत्रित करने का बेहद प्रभावी उपाय है। इसमें नदी किनारे त्रिकोणीय ढांचे लगाए जाते हैं, जो पानी की गति कम कर उसकी दिशा बदल देते हैं। इससे किनारों पर मिट्टी का कटाव रुकता है और धीरे-धीरे दोबारा मिट्टी का जमाव होने लगता है। लकड़ी अथवा आरसीसी से बने इन ढांचों को श्रृंखलाबद्ध तरीके से नदी किनारे स्थापित किया जाता है, जिससे बहाव का दबाव कम होता है और कटान पर प्रभावी नियंत्रण मिलता है।
मानसून अभी शुरुआती दौर में है और सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भोजपुरवा के किसानों की चिंता भी हर दिन गहराती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तत्काल बचाव कार्य शुरू नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में दर्जनों बीघा उपजाऊ जमीन और नदी में समा जाएगी तथा गांव का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
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